बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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मध्यमा उंगली पर खड़ी लकीरें कलाकार मित्र बताती हैं तथा आड़ी लकीरें
विश्वासघात करने वाले शत्रुओं की सूचक होती हैं ।
अनामिका उंगली पर खड़ी लकीरें उच्च स्तर के मित्र बताती हैं जब कि आड़ी
लकीरें उच्चपदस्थ अधिकारी शत्रु का दिग्दर्शन कराती हैं ।
कनिष्ठिका अंगुली पर खड़ी लकीरें इस बात की सूचक हैं कि उसके मित्र
व्यापारी वर्ग से संबंधित होंगे जब कि आड़ी लकीरें व्यापारी वर्ग से संबंधित होकर
धोखा देंगे ।
यदि खड़ी लकीरें पोरुओं को काटकर आगे बढ़ती हों तो ऐसे मित्र जीवन में
धोखा देने का प्रयास करते हैं । इन रेखाओं का अध्ययन सावधानी के साथ करना
चाहिए ।
१३. आकस्मिक रेखाएं :
हथेली में ये वे रेखाएं कहलाती हैं जो समय-समय
पर पैदा होती हैं और अपना प्रभाव दिखाती हैं। जब उससे
संबंधित कार्य समाप्त हो जाता है तब ये आकस्मिक रेखाएं
भी समाप्त हो जाती हैं ये हथेली के किसी भी भाग में या किसी
भी पर्वत पर उग सकती हैं या समाप्त हो सकती हैं।
ये रेखाएं जिस रेखा के साथ भी आगे बढ़ती हैं उस रेखा
के गुणों में वृद्धि करती हैं इसके विपरीत यदि ये रेखाएं किसी
रेखा को काटती हैं तो उस रेखा के गुण में न्यूनता ले आती हैं।
हस्तरेखा विशेषज्ञ को इन रेखाओं का अध्ययन भी
सावधानी से करना चाहिए ।
आकस्मिक रेखाएं
१४. सुमन रेखा :
हथेली में यह रेखा केतु पर्वत से निकल कर बुध क्षेत्र तक
जाती हुई दिखाई देती है यदि यह रेखा स्वास्थ्य रेखा को स्पर्श
करती है तो उस व्यक्ति को भयंकर बीमारी भोगनी पड़ती है ।
परन्तु यदि यह रेखा स्वास्थ्य रेखा के समानान्तर चलती हो तो
उसका स्वास्थ्य अच्छा रहता है ।
यदि यह रेखा बिना किसी रेखा को काटे हुए बुध पर्वत
तक पहुंच जाती है तो वह व्यक्ति देश का सम्माननीय व्यक्ति
होता है तथा कूटनीतिक क्षेत्र में वह अत्यन्त उच्च पद पर
पहुंचता है ।
यदि यह रेखा जंजीरदार हो तो उसे परिवार का सुख
नहीं मिलता । इसी प्रकार यदि यह लहरदार हो तो वह पीलिये
सुमन रेखा