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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 160, कुल 350 में से

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पृष्ठ 160

( १५६ )
११. भ्रातृ-भगिनी रेखाएं :
ये रेखाएं शुक्र पर्वत से निकलती हैं तथा मंगल
क्षेत्र की ओर जाती हुई दिखाई देती हैं। ये संख्या में जितनी
रेखाएं होंगी उसके उतने ही भाई बहिन होंगे। ये रेखाएं जितनी
ही अधिक गहरी, स्पष्ट और निर्दोष होती हैं उस व्यक्ति के
भाई बहिन उतने ही स्वास्थ्य की दृष्टि से अनुकूल होते हैं। यदि
ये रेखाएं कमजोर या टूटी हुई हों तो उसके भाई बहिनों का
स्वास्थ्य भी कमजोर समझा जाना चाहिए ।
इन रेखाओं में जो रेखाएं गहरी और चौड़ी होती हैं
वे भाई की सूचक होती हैं तथा पतली रेखाएं बहिन की संख्या
बताती हैं ।
इन रेखाओं में से जो रेखा मार्ग में टूटी हुई हों या भ्रातृ-भगिनी रेखाएं
छिन्न-भिन्न हो उस भाई या बहन की मृत्यु उसके जीवन काल में समझना चाहिए ।
यदि किसी के हाथ में ये रेखाएं न हों तो उस व्यक्ति के कोई भाई या बहिन
नही होता ।
१२. मित्र रेखाएं :
उंगली के पोरुओं पर कुछ खड़ी रेखाएं दिखाई देती
हैं ये रेखाएं मित्रों की सूचक होती हैं। यदि पोरुओं पर खड़ी
रेखाएं न हों तो समझना चाहिए कि यह व्यक्ति एकान्त-प्रिय
है तथा इसके जीवन में मित्रों का सहयोग नहीं के बराबर है ।
ये रेखाएं जितनी अधिक गहरी स्पष्ट और निर्दोष होती
हैं उसके मित्र उतने ही अधिक विश्वासपात्र तथा समय पड़ने पर
काम आने वाले होते हैं । इसके विपरीत यदि ये रेखाएं कमजोर
हों तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में मित्रों का सहयोग नहीं होता या
मित्र उसे जीवन में धोखा देते हैं ।
उंगलियों के पोरुओं पर आड़ी रेखाएं शत्रुओं की सूचक
मित्र रेखाएं होती हैं। यदि ये रेखाएं गहरी और स्पष्ट हों तो उसके शत्रु भी
मजबूत होंगे । इसके विपरीत यदि ये रेखाएं दुर्बल हों या टूटी हुई हों तो उस व्यक्ति
के शत्रु कमजोर होंगे तथा शत्रुओं पर वह पूरी तरह से हावी हो सकेगा ।
यदि तर्जनी उंगली पर खड़ी लकीरें हों तो वे नौकरी करने वाले मित्रों की
सूचक होती हैं इस प्रकार तर्जनी उंगली पर आड़ी लकीरें नौकरी करने वाले शत्रुओं
की संख्या बताती हैं ।