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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 81

२८ विविध तीर्थ-कल्प
मूल और अनुवाद सगोधन मे मुनि श्री नेमिचन्द्रजी ने मौन,
उपवास रहते हुए भी समेत शिखर जी मे उल्लेखनीय सहयोग
दिया। इसके लिए उनका भी आभार व्यक्त करना आवश्यक
समझते हैं।
विनीत
भँवरलाल नाहटा