विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ
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अनुक्रमणिका
मुनि जिनविजय जी का वक्तव्य ३
प्रस्तावना डा० ज्योतिप्रसाद जैन ७ से ३५
भूमिका १ से ३२
१ शत्रुञ्जय तीर्थ कल्प १
२ रैवतगिरि कल्प संक्षेप ११
३ श्री उज्ज्यन्त स्तव १३
४ उज्ज्यन्त महातीर्थ कल्प १६
५ रैवत गिरि कल्प १९
६ श्री स्तभन पार्श्वनाथ कल्प २२
श्री स्तभनक कल्प २९
७ अहिच्छत्रा नगरी कल्प ३०
८ अर्बुदगिरि कल्प ३२
९ मथुरापुरी कल्प ३६
१० अश्वावबोध तीर्थ कल्प ४४
११ वैभार गिरि-कल्प ४९
१२ कौशाम्बी नगरी कल्प ५२
१३ अयोध्या नगरी कल्प ५३
१४. अपापापुरी संक्षिप्त कल्प ५६
१५ कलिकुण्ड कुवकुटेश्वर कल्प ५७
१६ हस्तिनापुर-कल्प ६०
१७ सत्यपुर-सांचौर-तीर्थकल्प ६२
१८ अष्टापद महातीर्थ कल्प ६८