विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअनुक्रमणिका ३१
४६ समवसरण रचना कल्प १९६
४७ कुडुंगेश्वर नाभेयदेव कल्प २००
४८ व्याघ्री कल्प २०३
४९ अष्टापदगिरि कल्प २०४
५० हस्तिनापुर तीर्थ स्तवन २११
५१ कन्यानयन महावीर कल्प परिशेष २१३
५२ श्री कुल्पाक ऋषभदेव स्तुति २२०
५३ आमर कुण्ड पद्मावती देवी कल्प २२१
५४ चतुर्विंशति जिन कल्याण कल्प २२५
५५ तीर्थंकर अतिशय विचार २२६
५६ पञ्च कल्याणक सावन २२७
५७ कुल्पाक माणिक्यदेव तीर्थ कल्प २३१
५८ श्रीपुर-अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ-कल्प २३४
५९ स्तभन-पार्श्वनाथकल्प शिलोञ्छ २३६
६० श्रीफलवृद्धि पार्श्वनाथ कल्प २४०
६१ अम्बिका देवी-कल्प २४३
६२ पच परमेष्ठी नमस्कार कल्प २४७
६३ ग्रन्थ समाप्ति का कथन २४८
परिशिष्ट १
जीरापल्ली तीर्थ २४९
फलवृद्धि तीर्थ २५१
आरासण तीर्थ २५३
कलिकुण्ड तीर्थोत्पत्ति २५५
श्री अन्तरिक्ष तीर्थ-श्रीपाल राजा २५७
माणिक्य देव कुल्पाक २५९
श्री स्तभन तीर्थ २६१