सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 77, कुल 442 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 77

२६ विविध तीर्थ-कल्प
वैसा कोई क्रम नही बैठाया जो सम्पादकीय के नाते उन्हे करना
चाहिए था। हमने भी इसी क्रम से अनुवाद किया है। सं १९९०
मे मुनि जिन-विजयजी ने जब इस ग्रथ रत्न का अनेक हस्त-
लिखित प्रतियो के आधार से सिंघी जैन ग्रन्थमाला के ग्रथाक १०
के रूप मे प्रकाशित कराया तो अपने निवेदन के अन्त मे वर्त्तमान
राष्ट्रभाषा मे द्वितीय अवतार होगा जो ऐतिहासिक अन्वेषण वाले
विवेचनादि से अलकृत व स्थान विशेष के चित्रादि से विभूषित
होगा पर मुनि जी का वह मनोरथ पूर्ण नही हो सका। अन्त मे
तथाविध योग्यता न होने पर भी हमने ऐसे ग्रन्थ का हिन्दी मे
अनुवाद प्रकाशित होना चाहिए इस प्रबल भावना से यह अन-
धिकार सा कार्य किया है इसमें जो त्रुटियाँ रही हो उसके लिए
क्षमा प्रार्थी हूँ। विशेषज्ञ हमे संशोधनादि सूचित करेंगे। ऐसी
आशा है।
प्रस्तुत ग्रन्थ की प्रस्तावना डा० ज्योति प्रसाद जी जैन जैसे
जैनइतिहास के विशिष्ट विद्वान् ने हमारे अनुरोध पर लिख भेजने
की कृपा की है उसके लिए अत्यन्त आभारी हैं।
प्रस्तुत ग्रन्थ के