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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 65

१४ विविध तीर्थ-कल्प
महावीर प्रतिमा प्रतिष्ठा व आमराजा द्वारा जीर्णोद्धार कराने
आदि का महत्त्वपूर्ण उल्लेख है ।
७ अश्वावबोध तीर्थ भरौंच—यह तीर्थ भी मुनिसुव्रत स्वामी
के समय का है । इस कल्प मे उसकी उत्पत्ति का महत्त्वपूर्ण इति-
हास है । शत्रुञ्जयोद्धारक वाहक के अनुज अवड ने अपने पिता के
पुण्यार्थ शमली विहार का उद्धार कराया था, आचार्य हेमचन्द्र
द्वारा सिंधवा देवी के उपद्रव दूर करने का उल्लेख है ।
८ कौशाम्बी तीर्थ—यहाँ के पद्मप्रभ जिनालय मे उस समय
भगवान् महावीर को पारणा कराती हुई चन्दनबाला की मूर्ति
थी जो आज नही है । पास मे ही वसुहार गाँव था ।
९ अयोध्या कल्प से विदित होता है कि देवेन्द्रसूरि जी यहाँ
के तीन महाबिम्ब आकाश मार्ग से लाये थे जिनमे सेरीसा
पार्श्वनाथ का बिम्ब धारासेणक गांव के खेत मे रह गया था ।
महाराजा कुमारपाल ने उस महाप्रभावक बिम्ब की स्थापना
की थी ।
१० हस्तिनापुर मे शान्तिनाथ, कुंथुनाथ, अरनाथ और
मल्लिनाथ के मनोहर चैत्य थे । अम्बा देवी का भी देवल था ।
११ साचोर तीर्थ राजा नाहड़ निर्मापित और जज्जिंगसूरि
प्रतिष्ठित था । यह तीर्थ भी अत्यन्त चमत्कारिक था । सं० ८४५ मे
हमीर ने वल्लभी का भंग किया तब और बाद मे सं० १०८१ मे
गजनी पति भी साचोर का भंग करने मे असमर्थ रहा । सं० १३४८
मे भी ब्रह्मशान्ति ने चमत्कार दिखाया और सं० १३५८ मे अलाउद्-
दीन के भाई उलूखान के आक्रमण समय भी अनाहत बाजे सुनकर
सेना भग गई पर सं० १३६७ मे सुलतान अलाउद्दीन ने गोमांस
रुधिर से अपवित्र कर प्रतिमा को दिल्ली लाकर आशातना की ।