विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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नाओ में भाषा और गद्य-पद्यादि की दृष्टि से इस प्रकार वर्गीकरण
किया जा सकता है। संस्कृत की कुल २७ रचनाओ मे १४ पद्य
और १३ गद्यमय है। एवं प्राकृत की ६ पद्य और ३० गद्य रच-
नाएँ हैं।
विविध तीर्थकल्प के ६२ कल्पो मे निम्नोक्त तीर्थों सम्बन्धी
रचनाएँ हैं—
१ अणहिलपुर अरिष्टनेमि कल्प
२ अपापापुरी कल्प,
३ अयोध्याकल्प,
४ अर्बुदाद्रिकल्प,
५ अवन्तिदेश अभिनन्दन कल्प,
६ अश्वावबोध कल्प
७ अष्टापदगिरि कल्प,
८ अहिच्छत्रा नगरी कल्प,
९ उज्ज्यन्त (गिरनार-रैवतगिरि)
१० कन्यानयनीय महावीर कल्प,
११ कालिकुण्ड कुर्कुटेश्वर कल्प,
१२ काम्पिल्यपुर तीर्थ कल्प,
१३ कुड्डु गेश्वर नामेयदेव कल्प,
१४ कुलपाकऋषभ-माणिक्यस्वामी कल्प,
१५ कोकावसति पार्श्वनाथ कल्प,
१६ कोटिशिला तीर्थ कल्प,
१७ कौशाम्बी नगरी कल्प,
१८ चौरासी महातीर्थ नाम संग्रह कल्प,
१९ चम्पापुरी कल्प,
२० ढीपुरी तीर्थ कल्प,