विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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प्रकाशित की थी। उसके बाद भी बहुत से महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ प्रकाशित
हुए हैं। यशोविजय जैन ग्रन्थमाला, भावनगर से प्रकाशित और
मुनि जयन्तविजय जी व विशालविजय जी लिखित साहित्य विशेष
रूप से उल्लेखनीय हैं। आनंद जी कल्याण जी की पेढी श्वे० तीर्थ-
मदिरो की सबसे बडी व्यवस्थापिका है उसकी ओर से जैन तीर्थ
सर्व सग्रह नाम ग्रंथ की ३ जिल्दे स० २०१० मे गुजराती मे प्रका-
शित हुईं जिनमे भारत भर के जैनमन्दिरादि की सूची व मुख्य
तीर्थ स्थानो का इतिहास सब तीर्थों के नक्शे के साथ दिया गया
है। इत पूर्व स० २००५ मे मुनि श्री न्यायविजय जी (त्रिपुटी) ने
जैन तीर्थों नो इतिहास नामक ग्रन्थ प्रकाशित करवाया था। ये
दोनो ग्रन्थ श्वेताम्बर तीर्थों की जानकारी के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण
हैं पर गुजराती मे हैं। हिन्दी मे जैन तीर्थों का एक बडा सचित्र
ग्रन्थ मद्रास के जैन सघ द्वारा शीघ्र ही प्रकाशित होने जा
रहा है।
दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी, बम्बई द्वारा भगवान् महावीर
के २५०० निर्वाण शताब्दी के समय भारत के दिगम्बर जैन तीर्थ
ग्रन्थ प्रकाशन की योजना बनी थी। इस ग्रन्थ का पहला भाग सन्
१९७४ मे, दूसरा सन् १९७५ और तीसरा सन् १९७६ मे प्रकाशित
हो चुका है। चौथा भाग शीघ्र ही प्रकाशित हो रहा है और
पाचवा तैयारी मे है। यो तो श्वेताम्बरो की अपेक्षा दिगम्बर तीर्थों
सबधी साहित्य बहुत कम प्रकाशित हुआ है पर इन पाचो भागो से
अवश्य ही एक अभाव की पूर्ति होगी। प० बलभद्र जैन ने वर्षों के
परिश्रम से यह ग्रन्थ तैयार किया है एव सचित्र व सुन्दर रूप में
छपा है। आनंद जी कल्याण जी की पेढी को भी २५०० वें निर्वाण
महोत्सव के प्रसग पर हमने प्रेरणा दी थी कि श्वे० तीर्थों के सचित्र
इतिहास भी हिन्दी मे इसी तरह के प्रकाशित किये जाए पर खेद