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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 55, कुल 442 में से

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ग्रन्थो मे भी छप चुके हैं। जैन तीर्थों सम्बन्धी सामग्री इतना
अधिक प्राप्त है जिनमे से कुछ तीर्थयात्राएँ आदि प्राचीन तीर्थ-
माला सग्रह मे प्रकाशित हैं पर अप्रकाशित सामग्री इतनी अधिक
उपलब्ध है कि जिसके अनेक खण्ड तैयार हो सकते हैं। गत पचास
वर्षों मे हमने भी अनेक स्थानो से ऐसी प्रकाशित सामग्री का
सग्रह करना चालू रखा है जिसके फलस्वरूप बहुत वडी सामग्री
एकत्र हो चुकी है इनमे से कुछ तीर्थमालाएँ आदि कई पत्र-पत्रि-
काओ मे प्रकाशित करते रहे हैं। कुछ सामग्री एल० डी० भारतीय
सस्कृति विद्यामदिर, अहमदाबाद से एक सग्रह के रूप मे प्रकाश-
नार्थ प्रेषित है।
तीर्थों सम्बन्धी साहित्य का प्रकाशन
दिगम्बर और श्वेताम्बर उभय सम्प्रदायो के सैकडो तीर्थ
भारत के कोने कोने मे विद्यमान हैं। प्राचीन काल से उन तीर्थों
की यात्रा साधु-साध्वी एवं चतुर्विध सघ तथा श्रावक सघ करते
आ रहे हैं। ऐसे बहुत से यात्री सघो का विवरण समय समय पर
लिखा जाता रहा है। यो तीर्थों के माहात्म्य और ऐतिहासिक
वृत्तान्त काफी लिखे गए। ऐसे साहित्य का प्रकाशन बहुत वर्ष पूर्व
कुछ हुआ था पर इधर मे प्राचीन सामग्री विशेष प्रकाश मे नही
आ रही है।
आवागमन की सुविधा पूर्वापेक्षा बहुत अधिक बढ चुकी है
अत यात्री सघ खूब निकलने लगे पर स्थिरता के अभाव मे जैसा
चाहिए लाभ नही उठाया जा रहा है। तीर्थों की यात्रा के लिए व
प्राचीन इतिहास जानने के लिए लोगो की बहुत उत्सुकता है पर
जिस ढग का और जितने परिमाण मे साहित्य प्रकाशन व प्रचार
होना चाहिए, नही हो रहा है। तीर्थों सम्बन्धी प्रकाशित साहित्य
की एक सूची लगभग ३० वर्ष पूर्व प्रेमी अभिनन्दन ग्रन्थ मे हमने