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सर्वकोश
विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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समाजव्यवस्था को भी अत्यन्त प्रभावित एवं प्रवर्तित किया ।
धन, भोग और राज्य की लिप्सा ही उन नवागतो मे सर्वोपरि
थी, और उसकी पूर्त्ति के लिए—अपनी सत्ता एवं सख्या के
सरक्षण और विस्तार के लिए वे बहुधा धर्म और धर्मोन्माद को
प्रबल अस्त्र बनाते थे, जिसके कुफल देशज जनता को भोगने
पडते थे । तथापि, अत्यधिक बहुसख्यक भारतीयो पर निरन्तर
क्रूर अत्याचार करते रहना और उनके धर्म, सस्कृति एवं रीति-
रिवाजो की सर्वथा अवहेलना करना, स्वयं मुट्ठी भर मुसलमान
सत्ताधारियो के हित मे नही था, व्यावहारिक और उतना सरल
भी नही था । मुल्ला-मौलवियो की सदैव यह चेष्टा रहती थी कि
राज्यशासन पूर्णतया मजहबी-मुल्मानी हो जाय, जो केवल
इस्लाम और मुसलमानो के ही लाभ के लिए हो और जिसमे
काफिरो ( अन्य धर्मियो ) के प्रति किसी प्रकार की भी उदारता
एव सहिष्णुता न बरती जाय, तथा सुल्तान जो कुछ भी करे,
‘शरह’ के अनुसार अर्थात् उक्त धर्माधिकारियो के आदेश-निर्देश
के अनुसार ही करे । किन्तु