विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
पृष्ठ 423, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें३४० विविध तीर्थ-कल्प
महावीर (घण्टाकर्ण) १९५ मिथिला ४, २७, ७१, ७२,
महावीर प्रतिमा विंव २१८, ७३, ७७, ११२, ११८ १७०
१४५, १८५ मुक्तिनिलय १
महिस गाम ४८ मुद्गलगिरि ४०
महीघर (हाथी) ५७ मुनिसुव्रत (जिन) २३, ४१, ४४
महीपति (राजा) ४६, ४८, ६१, ९३, ९७,
मधुसूदन (भवन) ९० १०५, १०७, १७८, १७९,
मधुवन ४१ १९४, २३१, ५१, १३०,
महेठगाम १५८ २१०
माणिक्य साहु १२० मुहडासा (नगर) ६७
माणिक्य देव १९३, २१० २३१ मूलदेव १५५
२३२, २३३ मूलराज ११५
माणिक्य दंडक १९४ मेतार्य (गणधर) १७०, १७१,
मणिभद्र (यक्ष) ९, १५९ १७२, १७४
माधवराज १२२, २२३, २२४ मेघकुमार ५१
मातलि २४ मेघघोष ३, ८, ९१, १५६,
मायासुर १३८, १३९ १४१, मेघचन्द्र (दि०आचार्य) २२२
१४२, १४३ मेघनाद ११, ५१
मालव देश २०, १२७, १३० मेडतानगर २४०
मालवेश \ मेदपल्ली १८७
मालवपति } १३३, १३४, ६७ मेरुपर्वत ९९
मालि ३४ मेवाड देश ६७
माहणकुण्ड ७६ मैनाक (पर्वत) ३५
माधव (मत्री) ६७ मोक्षतीर्थ १३२
माहेन्द्र पर्वत १९३, १९४ मोखदेव (श्रावक) १७५
मृगावती ५२ मोढेरा (गाव) ४१
म्लेच्छराजा ३१ मोरिय (विप्र) १७