विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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दशपुर १५७, १९३ दुर्बलिका पुष्यमित्र ४०
दगदगार मडप २१ द्रुपद राजा १६३
दश वैकालिकसूत्र ९१, १४८ द्विपृष्ठ (भावी वासुदेव) ९४
दशार्ण पर्वत १७८ दुइज्जंत (तापस) ६५
दडअणगार ४१ देपाल मंत्री २१
दडकारण्य २४ देल्हण (सेठ) १७६
दडक राजा ११९ देव (१) ९४
द्रविण नृप २ देव (२) १५०
दामोदर ११, १३ देवकी ९३
द्वारिका ११६, ११९, २५, १९४, देवगिरि (नगर) १०१, १०३,
२३७ १०५
दाहिमकुल १०२ देवयानी ११२
द्वात्रिंशद्द्वात्रिंशिका २०१ देवदत्त (वणिक्) १५०, १५१
द्वादशांगी ५७ देवदत्ता (गणिका) १५५
दिन्न (तापस) २०९ देवपत्तन ६६, २४३
दिगम्बर १०५ देव वाराणसी १६८
दीनारमल्लिक २१५ देवशर्म (विप्र) ९४
द्वीपायन } देवसिंह ४३,
द्वैपायन } ९३, ११९ देवश्रुत ९३
दीर्घदन्त ९४ देवसेन ९३
दिल्ली (पुर मंडल) ६७, ६८, देवानन्दसूरि १७६
१०३, १०५, २१४, २४८ देवानन्दा ७६
दुग्गासूय (गांव) ६४ देवेन्द्रसूरि ५४, ५५
दुर्योधन (राजा) ६१, ८७ द्रोणाचार्य ८७
दु शासन ८७ द्रौपदी १६३
– ध –
दुष्प्रमहसूरि } धनगिरि (मुनि) २०९
दुप्पसहसूरि } ३, ९, ८८, ९१