विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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३२८ विविध तीर्थ-कल्प
गिरनार १३, २०, ३१, ४१, १०४,
१८०, २१८, २७
गिरिविदारण ११
गुजरात ६५, ६६, २०, ६७, ११४,
११५
गुर्जराधिपति २१
गुर्जरधरा १२१, १७९
गुणचन्द्र (दिगंबर) २४२
गुणसागर मुनि ५९
गूढदन्त ९४
गूर्जरेश्वर ३५
गौतम गणधर ८७, ९४, ९६, १००,
११२, १६०, २०९, २१०, ५१
गौतम गोत्र १७०
गौतम गगा ११८
गोग्गलिक ३४
गोदावरी १३१, १३४, १४३
गोपदराई ५५
गोपाली आर्या १६४, १६५
गोव्वर ग्राम १७०
गोमटदेव १९२
गोमुख यक्ष ५४
ग्वालियर ४१
गोह्द मडल २०२
गौड देश ७६, १५८
गगदत्त ६१, २१२
गगा नदी ५९, ९२, १११, ११८,
१५०, १५४, १६१, १६५,
२०८,
गंगा-यमुना वेणी सगम १९३, १९४
गंगासागर तीर्थ २०८
गंगाहृद १५५
गंडकी नदी ७२
गंधारी देवी ७३
गांगेय ८७
ज्ञानशिला १८, १९
- घ -
घघरद्रह ५४
घृतपुष्यमित्र ४२
घृतवसति १७५
घर्घरनद ७४
घंटशिला १२
घटाक्षर शिला १५
घटाकर्णमहावीर १६५
घुंटारसी ग्राम २०२ - च -
चतुर्मुख ९०
चक्रतीर्थ ४१
चक्रायुध गणधर १७८
चक्रेश्वरी ६, ५४, २२०
चणकपुर ५०
चाउक्कड (चावड़ा) ११५