विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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३२० विविध तीर्थ-कल्प
यह सुन कर नाहड़ राजा अत्यन्त हर्षित होकर अपने स्थान
पर गया । तब से वह त्रिकाल पूजा परायण रहने लगा । अन्य
तीर्थों की भी वह यात्रा करता था । जिनशासन प्रभावक नाहड
अन्तिम समय श्री गुणसुन्दर सूरि के समक्ष अनशन करके तीर्थ
के माहात्म्य से मुक्ति पद पावेगा । यह प्रथमानुयोग के अन्तर्गत
है। इस प्रकार सोलहवाँ अध्ययन पूर्ण हुआ ।