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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 369

२८६ विविध तीर्थ-कल्प
३६, ज्ञातनाथ जी बिंब ८०, ऋषभदेव जी बिंब ३१, धात की ४०,
गौडी पार्श्वनाथ जी बिंब धातु का ९। चौमुख जी भाडासाह बिंब
२८, पाषाण का धात ४, अजितनाथ जी बिंब ७५, पाषाण का धात
का ५२। सावलिया पार्श्वनाथ बिम्ब ७, पाषाण धात का १०।
वासपूज जी बिंब ५, पाषाण धात का ९, महावीर जी बिंब ४,
पाषाण का धात का ११, चीदास सुपार्श्वनाथ जी महावीर जी रै
देवरौ भेलो बिंब १, गौडी पार्श्वनाथ जी बिंब १, धातु की ८७,
पगल्या गणधर दादा जी ८४, दादा जिनदत्त सूरजी, जिनकुशल
सूरजी का पगल्या ८४, महावीर जी बिंब ३१, पाषाण धात ११,
चंदाप्रभुजी बिंब ४, धात का २१।
गांव देशनोरु देवरा २, संभवनाथ जी बिंब ३, धात की ११,
उपासरे खरतरा रै ऋषभदेव जी बिंब १, धात का ७। नागोर
देवरा—ऋषभदेव जी बिंब २२५ (पाषाण २१२ धात का १३),
ऋषभदेव जी बिंब ५२, अजितनाथ जी बिंब ५, शांतिनाथ जी
सावलिया पार्श्वनाथ जी बिंब १६, गोडी पार्श्वनाथ जी बिंब ३
उपासरे मे खरतरारै बिंब १४, पायचंद्रा रै उपाश्रय २१, खरतरै
फेर दूजै उपाश्रै बिंब २२।
मेडतै देवरा १३, महावीर जी बिंब ४, धात १०, पाषाण का
चिंतामण पार्श्वनाथ जी बिंब १५, पाषाण धात ९, वासपूज जी
बिंब ७, अजितनाथ जी बिंब ७, धात ४, अजितनाथ जी बिंब ११,-
शांतिनाथ जी बिंब १७, पा० ऋषभदेव जी बिंब ७, पा० धा० २०,
नवौ देवरो ऋषभदेव जी रो बिंब ११, वाडी पार्श्वनाथ जी बिंब
३, पाषाण धात ४५, शांतिनाथ जी बिंब १५, पाषाण धा० १३,
धर्मनाथ जी बिंब ७, पा० देरासर बिंब ५, धात का वासपूज्य जी
बिंब २, कवला रै उपाश्रै बिंब ४, पा० धा० की ७ देरासरा मे।
अजमेर मे देहरा २, एक संभवनाथ जी जिसमे धात की