सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 368, कुल 442 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 368

देहरो १, माहावीर स्वामी रो छै जीन से बिंव ३८, सर्वधात
पाषाण का ८४ बिंव, पाट २४, देवी को छै ।
सैहर मे देह रो १, सुपारसनाथ जी को छै । जेसलमेर सैर मे
तपा रा उपासरा कनै सुपार्श्वनाथ जी बिंव ४५, गोडीपार्श्वनाथ
जी को देहरो १, बिंव ५, छै । तपा रो छै दे हुदो है देहरो थेरासा
रो बिंव २१ छै। सुपार्श्वनाथ जी का देहरा मे भोमीयोजी रा
पगलिया छै। सुपार्श्वनाथ जी का देहरा मे माणभद्र जी हीर-
विजयसूर जी प्रतिभा छै ।
कोस १, गगासागर तलाव छै, जठे माणभद्र जी छै, गोडी जो
रा पगलीया छै, गोरा जख पाषाण छै, सावलीयो छै, दादा पग-
लीया छै, कुसलगुर गटीसर भायें, गोडी जी रा पगलिया छै छत्री
माहे धरमशाला छै । दादा रा पगलिया छै, क्षत्री छै कोस १, क्षत्री
३ दादा री छै माहे पगला छै, तलाव छै फूल की वाडी छै ।
उपासरा तपा रा २, खरतरां रा २, आचलीया उपासरो १,
वेगडां रो १ छै लुकडी नो उपासरो १ छै ।
लोद्रवे देहरा ६, तपारा ३ छै, चिंतामण पारसनाथ जी का
देहग मे बिंव ७ पाषाण का छै, धात का बिंव १४, देवी ३ छै ।
सिद्धचक्र जी १ सहस्रफणो पारसनाथ बिंव ३ पगल्या ८८ गणधरना
ऋषभदेव जी रो देहरो १, बिंव -, धातरी प्रतभा १, पगल्या
सत्रुंजा का २४, देहरो १, अजितनाथ जी को मूलनायक १, सिं
नाथ जी को १, देहरो १, मूलनायक १, अष्टापद जी को देहरो १,
बिंव २४ । दादा रा पगला तपा रो उपासरो १, खरतरा १, धर्म-
शाला ५ क्षेत्रपाल १ ।
गांव फलोधी देवरा ३, ऋषभदेव जी रो १, बिंव २१, पाषाण
का धात की ७, श्री शांतिनाथ जो को बिंव २१, धात की ६३,
सीतलनाथ जी को बिंव ३, पाषाण की धातु की ४ । बीकानेर
देवरा १३, श्रीचिंतामण पार्श्वनाथ बिंव ३६, पाषाण की धातु की