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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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२८४ विविध तीर्थ-कल्प

गावतिवरी देहरो १, दादा पारसनाथजी को बिम्ब ६ धातु
का पाषाण का २ देहरो १ टीका पारसनाथजी को बिम्ब २१
पाषाण का। गाँव १ पोहकरण देहरो श्री गौडी पारसनाथजी
को बिम्ब ४५। १५ पाषाण का धातु का ३० देहरो १ ऋषभदेव-
जी को बिम्ब १२ पाषाण का धातु का ५०।
जेसलमेर चिन्तामणि पार्श्वनाथ जी मूरत ८५, दरवाजा बारे
१७, फीरती ४३१, गणधर की मूरत १७ पाट १००८४ पाट
सोद्धाचल जी कौ, १०८ प्रातमा पाट २, १`०।१७० बीस बीस
२० सब सख्या ५७७ पाट ४ सख्या ७३२ संख्या चिंतामणि जी
की १३०९ शीतलनाथ जी को मिंदर १ देहरा मांहे विव २७
गुवारा बारे १०२ पाट १।१०८। सख्या २३७ संभूनाथ गु भारा मे
तो नव दरवाजा वार ९६ भवती मे ८४ पाट २५१ एक ६४
सख्या २९५। दरवाजा वार पाट १७०।१७० सब सख्या ६३५
देहरो १ शातिनाथ जी को १९६ विव पाट ३२।७० तीर्थकरा
रो सेतुजा की जी रौ चौवीसी रो पाट पादुका २, आचार्य रो श्री-
पुजकरायौ, हाथो २, ऊपरै शातिनाथ जी की माता पिता छै वठा
छै, देहरो १ नीचो अष्टापद जी रौ भमती माहे ५४ विव, पाट
१।१७०। २, पाट १७० पाट ३।२४ तीन रा छै। वाहिरी भमती
मे १३० विव छै देहगे १, आदीसर जी को धात का विव ५,
पाषाण का ९, सिद्धचक मूधा मूल गभारा मे माहीला भमती मे
विव छोट माट १८२ वाहग्ला भमती मे विव ८१० पाट ३
चोवीसी का पाट २, भारी १७०।१७० तीर्थंकर सिद्धाचल जी रो
पाट एक १०८ विव। देहरो १, चदाप्रभु जी को चोमुखो विव २४,
विव माहेली माही भमता वारला भमती ५१ विव पाट ६ देवी ग
पाट २, चौवीसी पाट ४, सासन देवी रखवाली सासन जिन रो
रखवाला पाट २। दूजी भूम १८० विव चौमुखा चदाप्रभु जी को
मूल नायक छै, भमती २०, विव छै चौमुखा मे चंदाप्रभु जी छै।