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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 366

परिशिष्ट २८३

गान्तनाथजीको विम्व ५१। गाँव १ गंडारी देहरा २ तिण मे विम्व
५८। गाँव १ तालरो देहरो १ ऋषभदेव जी को बिम्ब ३। गाँव
१ नांदीयो देहरा ३ जीवतस्वामी को विम्ब ४७, पगल्या महावीर
जी का १ काउसग रह्या डुगर को पथर हेठे पडतोथो, ओ पगल्या
१ काउसग्ग ऊभा था। उपवास मा हे देहरासर शान्तनाथ जी को,
उहाँ से गाउ ३ देहरो १ गाँव लोटाणो श्रो ऋषभदेवजी बिम्ब ११।
बाभण वाडदेहरो १ श्रीमंहावीर जी को विम्ब ७५, पगल्या २
उहाँ श्री भगवान पोते का उसग्ग रह्या खरचेद, उहाँ कासी
नीखीली भगवान काढी, पाहाडफाटो, समुद्र जलफलीया, वेद
रो जीव देवलोक गया, देहरा का दरवाजा ४ भमनी की देहरी
५२, मोटो सीखरबन्ध धरमशाला ३, पानडी २, एहको मोटो
देहरो छै वरसो वरसी मेलो भरीजे छै, लोक जात्रा करण नै
घणा आवै छै। गाँव पडवाड देहरा ३ एक तो महावीर स्वामी,
एक पारसनाथ जी, एक गोडी पारसनाथ जी। उपासरा मोहे
सर्वसंख्या विम्व १७ देवी ३। गाँव १ माकड़ो देहरो १ विम्व ३।
गाँव १ नांदोत देहरो १, महावीर जी को विम्व ६७। गाँव १
बीजापुर देहरा २ महावीर जी राता मुहड र मे गाउ ३ देहरो १
पारसनाथ जी को पगल्या २४। गाँव १, साहवाड़ो देहरा २।
१ रीखभदेव जी को दुजो १ उपासरा माहे बिम्ब संख्या २८।
गाँव १, वाली देहरा ३ एक महावीर जी को एक सान्तनाथजी
को एक धरमनाथजी को, उपासरा माँहि विम्व ४१। गाव १
खीमाणदो देहरो १ शान्तनाथजी को विम्ब ३।
जोधपुर का देहरा ५ श्री सम्भवनाथजी को देहरो विम्ब १९,
श्रीमहावीरजी को विम्व २१, पाषाण का धातु का ४३। देहरो
१, गान्तिनाथजी को पाषाण का ११, धातु का ३ विम्व। मंडोवर
मे देहरो - चिन्तामण पारसनाथजी का धातु का विम्व ९, पाषाण
का विम्व १८ ऋषभदेवजी को देहरो बिम्ब २४ पाषाण का।