विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपगला, शेषफणा पारसनाथ जी, ते मा थम्भ ८४, ते मा थम्भ
बे लाख ना वे तिने साहमां धनौ पोरवाड हाथ जोडि उभा छै.
सम्मेद-शिखर जी घरकोट स्वर्ग पाताल मृत्युलोक को छै अष्टा-
पद जी, गरबर जी, क्षेत्रपाल जी, माता भवानी, २९ तामा छै ।
कोठा १, सोना रूपा की भरी तीन वार लुटाई सुपना १४, नो
आकार छै । मुरादेवी माता धर्मशाला १, दरवाजा बारह दरवाजा
४ छै । कुंड १ मडल ८, अजोतनाथ जी को, गौड़ि पारसनाथ
जी, वासपूज जी, चौमुख जी, सहसकूट, सहसदेव, णिद्धाचल जी,
दादाजो का पगला, जमले सर्व मिली ४९, दर्शन करया छै ।
तिहाँ थी चाल्या नंडालि मा देरा ५, सन्तनाथ जी, पद्मप्रभु
जी, नेमनाथ जी, जगवाल पारसनाथ जी, शीततनाथ । नाडलाह
मा देरा ११ छै ऋषभदेव जी ना देरा २, १, देवरो अपासरा
मा अजीतनाथ जी को सुपार्श्वनाथ जी ऊपर जादवा जी को वास-
पूज जी को नेमनाथ जी को ।
तिहाँ थी गाळ ३, धानोरा छै ते माय देवरा ७, छै—गौड़ि
पारसनाथ, ऋषभनाथ जी, धर्मनाथ जी, कुन्थुनाथ जी, देरासर
१, उपासरा मा जिगवला पारसनाथ । तिहाँथि गाम टालिऊ ७,
ते मद्दे देवल १, सन्तनाथ जी रो । तिहाँ मे गळ ५ हिलोद—ते
मद्दे देवल ५, उपासरामा देवल १, ऋषभदेव जी रो १, गान्ति-
नाथ जी रो १, पारसनाथ जी को १, गौडी पारसनाथ जी को १ ।
तिहाँ से १ उदयपुर गळ ७, ते मद्दे देवल २४, ऋषभदेव जी
रा ४, शेषफना पारसनाथ जी रा २, गौडी पारसनाथ रा २,
शीततनाथ जी का ३, चदाप्रभु जी का ३, सामलिया पारसनाथ
जी का १, सुपार्श्वनाथ जी का १, दादा पारसनाथ जी का १,
पद्मप्रभु जी को १, सन्तनाथ जी को २, चौमुख जी २, पारसनाथ
जी को । तिहाँ से पुरा मे देवरा २, सन्तनाथ जी को १, पदमनाथ
जी को १।