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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 363, कुल 442 में से

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पृष्ठ 363

तिहाँ से २, सिहोर—तिहाँ देवल ३, ऋषभदेव जी रो १,
सन्तनाथ जी रो १, नागेसर जी रो देरी । तिहाँ से गऊ १८, गाम
धुलेव जी—तिहाँ देवल १, केसरियानाथ जी, ऋषभदेव जी,
भमति १, ते मद्दे नेमनाथ जी, सन्तनाथ जी, गामनदेवी १,
मानभद्र जी, महाराज, सामे ८८, गणधरना पगल्या, धर्मशाला
३, वावडी १ ।
तिहाथि गाऊ ७, डूगंरपुर छै ते मद्दे डेरा ४, छै ऋषभदेव
जी रो १, कल्याण पारसनाथ जी, चिन्तामन, पारसनाथ जी को
३, सामलिया पारसनाथ जी को । तिहाँथि गाम १, सरदार, देवरो
१, ऋषभदेव जी को । तिहाँथी गाम १, सपदी सन्तनाथ जी को
देवरो १, गाम १, अपेनगर देवरो १, महावीर जी को, तिहाथि
गाम वीजापुर मा देवरा ७, ऋषभदेव जी को चौमुख जी असनाथ
जी, चिन्तामन पारसनाथ, नेमनाथ पदमावती की गाम १,
अटवाड़ो देवरो १, शान्तिनाथ जी को गाम १, बजान ऋषभ-
देव जी को १ ।
तिहाँमे गाम १ वर्द्धज्यो (वदरज्यो) देवल १, संभवनाथ का,
तिहाँथि गाम १, रतनपुर ते मद्दे देवल १, ऋषभदेव जी को,
तियाथि गाम १, सुरो ते मद्दे देवल १, सन्तनाथ जी को, गाम १,
वरावन देवरो १, ऋषभदेव जो को, गाम १, पाटरी देरो १,
शान्तिनाथ जी को गाम बढ़वान देरो १ सन्तनाथ जी को, गाम
१ दामरो ते मद्दे देरो १, ऋषभदेव जी रो तिहाँ से गाम १,
पंचासरा ते मद्दे देवल १, महावीर जी को, तिहाँ से गहरु १,
गाँऊ राघनपुर ते मद्दे देवल १८, अजीतनाथ जी को २, चिन्ता-
मणि जी को २, प रसनाथ•जी को १, ऋषभदेव जी का २, सन्त-
नाथ जी ३, पारसनाथ जी का २, महावीर जी का २, सामलिया
पारसनाथ जी को १, गौपफणा पारसनाथ जी को १, वासपूज जी
को १, धर्मनाथ जी को चौमुखीडिया पारासनाथ जी को १, ऋषभ-