विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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सामने विमलशाह पोतानो सर्व परिवार लेई ऊभा छै । खजानो
समा साथै धर्मशाला मा छ., ते सामे अजितनाथ जी को डेरो छ.,
ते सामे सन्तनाथ जी को देरो छ । ते ऊपर सामलिया पारसनाथ
जी रो देवल, ते ऊपर सिद्धाचल जी की चौवीसी, दरवाजा ४,
धर्मशाला ४, फूल की वाड़ी कुण्ड १, देह (च) हुम्वड को १ ।
तिहाँ से चाल्या गौउ तीन अचलगढ़-तिहाँ देवरा ७, हेठे
चौमुख जी १, नेमनाथ जी १, पारसनाथ जी को १, कुन्थुनाथ जी
को १, ऋषभदेव जी को १, किर हेठे गाम सामने सन्तनाथ जी
को देरो १, गाम हेठे कुड १ धीनो, चाडाबे घी पी गया । जरणना
चौमुख जी कचन का, ते ऊपर चौमुख जी रो दोहरो वन्यो छ. ।
तिसे गाऊ दो महावीर जी देरो १ गाम भा छ ।
तिहाँ से गाम सिरोई-गाळ २५ ते मद्दे देवल १४, देवरा
जिरावला पारसनाथ जी को १ ऋषभदेव जी का चौमुख सुवा २
अचल पारसनाथ को १ मुनि सुव्रत को १ नेमनाथ जी को १
संभवनाथ जी को १, चिन्तामण पारसनाथ जी को १, सीतल-
नाथ जी को १ चन्द्रप्रभु जी को १ नन्दीसरद्वीपा १ महावीर जी
१ श्रेयासनाथ जी १, गोडी पारसनाथ जी १ गान्तिनाथ जी को ।
तिहाँथि चाल्य गाम गळ ४०, बरकाना जी देवरो १,
वरकाना-पारसनाथ जी को १, तेनि मति ५२ देरी, सामि चौबीसो,
बाहर जागदेव नो कुड केसर को हेठे कुंड १, धर्मगाला २,
दरवाजा बार ।
तिहाँ से गाम सादरी गाळ १२ ते मद्दे देवरो १, गान्तिनाथ
जी को भमति देवरो १, ऋषभदेव जी १ ।
तिहाँ से गळ ३, राणपुर भछे देवल १, मद्दे ऋषभदेव जी
ना चौमुख ३, तीसरा माल तांई, ते हेठे महावीर जी, समोशरण
जी मोक्ष वसि सांवलिया पारसनाथ, नेमनाथ जी, भुवैंरा १४,
अन छ ८४, मेरु पर्वत, नन्दीसरद्वीप सिद्धचक्र ८४, गवरता-