विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट [२७७]
जी को १, ते ऊपर सहसफणा पार्श्वनाथ जी, तीसरे मालगोडी
पार्श्वनाथ जी तिहां से पुर ७ मे शांतिनाथ जी, तिहां से चाटक
गाउ ३, गाम बड़नगर ते मद्दे देवरा ६, ऋषभदेव जी रा २,
महावीर जी का १, कुन्थुनाथ जी का १, सहसफणा पार्श्वनाथ जी
का १, ते सामा पवप्रमेश्वरी १, तिहा थी चाल्या गाउ ७, गाम
श्रीपुर मद्दे देवल १, मुनि सुव्रत वीसमा को, तिहां थी चाल्या
गाउ ७, गाम तारंगाजी ने मद्दे देवल ७, धर्मशाला २, कुड २,
तालाव १, देवल १, अजितनाथ जी को सहसकोट १, मेरु पर्वत १,
समवगरण १, अष्टापद जी १, नन्दीश्वर बावन चोमुख गिरवर
जी का पगल्या, तिहा दस हजार साधु समोसर्या, चोरासी गणधर
का पगल्या, चोमुख । शान्तिनाथ जी को देवल १, सामलिया
पार्श्वनाथ जी १, शासनदेवी १, आचारज उपाध्याय ता पगल्या
जक्षदेवी की चोकी मुनीसर की टकरी ते ऊपर देरी छे मध्ये पगल्या
छे, अनन्ता साधु सिद्धी गया । हेठे हडुमान जी छे ।
तिहा से गाउ वारे गाम १, जसोरात मद्दे देवल १ संन्तिनाथ
जी को, तिहा से गाउ ३ गा पालाणपुर सेर १ ते मद्दे देवल ८
पालविया पारसनाथ जी को, ऋषभदेव जी को २, भमति माँ
गवडी पारसनाथ जी को १, शांतिनाथ जी को ३, सम्भवनाथ जी
को १, नेमनाथ जी को १, महालक्ष्मी को १, तिहाथी चाल्या
गाम आबुजी आवया ते मद्दे देवल १३, ऋषभदेव जी का ३,
नेमनाथ जी को १, भमति माँ मुनिसुव्रत स्वामी को देवल १,
तहाँ चौवीसी है । पार्श्वनाथ जी का चौमुख ३, तीजे खण्ड केसरी
चकेसरी आसनदेवी चेतरपाल १, देवरानी-जेठानी गोखला २,
जीके ऊपर चौमुख २, मिडल ऊपर देवल १, सन्तनाथ जी को
नेमनाथ जी की भमति माँ १२, पातगाह सामलिया पारसनाथ जी
को चौमुख दरवाजा बाहर क्षेत्रपाल से हेठे नागजी दूदमजी ते