विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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नाथ जी पाचमा चारा मा सतिनाथ चन्दाप्रभु सामलिया पार्श्वनाथ
तिहा थी गाम खेडा, ते मद्दे देवरा १०, पलवीया पार्श्वनाथ को
देवल १, अमीझरा पार्श्वनाथ जी को १, भोअरा मा चन्दाप्रभु जी
चोमुख जी १, अरनाथ जी १, समोसरण को दरा १, अष्टापद जी
को देवल १, संभवनाथ जी को देवल १, सन्तनाथ जी को देवली
परा मा देवल ऋषभदेव जी को ।
तिहाँ से ग्राम पाटण मद्दे देवल ११, महसकोल जी १ सहस-
फणा पार्श्वनाथ जी का देवल २, ऋषभदेव जी का देवल ९, मेरु-
पर्वत १, अष्टापद जी १, समोशरण १, महावीर जी २, सुपार्श्व-
नाथ का २, चन्दाप्रभु जी का ३, चिन्तामणि पार्श्वनाथ जी का ७,
पञ्चासरा जी को १, भमति मुनीसर को १, अजितनाथ जी का
देवल ४, शम्भुनाथ जी ३, गोरी पार्श्वनाथ जी २, वाडि पार्श्वनाथ
जी को चोमुख १, नारगा पार्श्वनाथ जी को १, वासपूज्य जी का
२, मन्दर स्वामी को १, सखेस्वर पार्श्वनाथ जो को कोका
पार्श्वनाथ जी को १, जिरावला पार्श्वनाथ जी को १, अभिनन्दन
जी को २, सुमतिनाथ जी को २, सुवधिनाथ जी को १, सीतलनाथ
जी को ३, कुन्थ्युनाथ जी को १, नेमनाथ जी को १, नमिनाथ जी
को १, मल्लिनाथ जी को १, सन्तिनाथ जी को ९, मुनि सुव्रत जी
का २, धरमनाथ जी का २, विमलनाथ जी का २, अनन्तनाथ जी
का १, पद्मचन्द्रप्रभु जी को ३, रतनपार्श्वनाथ जी का २, कल्याण
पार्श्वनाथ १, मानमोहन पार्श्वनाथजी को १, भांडमोहन पार्श्वनाथजी
को १, मुनि पार्श्वनाथ जी को १, भाद्रवा पार्श्वनाथ जी १, वास-
पूज्य जी का १, टीका पार्श्वनाथ जी को १, सन्तिनाथजी को २ ।
तिहाति चाल्या गाउ ५, ग्राम भटेवा मद्दे देवल २, भटेरा
पारापार्श्वनाथ जी रो १, ऋषभदेव जी उपर ।
तिहाथी वीसनगर आल्या ते मद्दे देवरा ४, कल्याण पार्श्वनाथ