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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 357

२७४ विविध तीर्थ-कल्प
चन्द्राप्रभु जी रो १, वासपूज जी को १, मुनिसुव्रत स्वामी को १,
सुपाश्र्वनाथ जी को १, सहसफणा पार्श्वनाथ जी को १, गाम नदना
वीदर मा देवरा ४, ऋषभदेव जी का २, नेमनाथ जी का १,
गातनाथ जी का १, गाम १ पुरो तेमा देवरा २, गोडी पार्श्वनाथ
जी को ऋषभदेव जी को, सेर खभात देवरा ६५ छे, तैंनी पूजा
करी, सर्वमली ८४ छे। थभन पार्श्वनाथ मुनीसुव्रत, पदमप्रभु,
खेरा पार्श्वनाथजी, चोमुखजी, ककीन सुपाश्र्वनाथ, रत्न पार्श्वनाथ,
सखेश्वरा पार्श्वनाथ, अठारमा अरनाथ जी का २, सहसफणा-
पार्श्वनाथ जी का २, देवरा कुथनाथ जी का ४, मल्लिनाथ नू १,
सम्भवनाथ जी को २, सीतलनाथना ९, ऋषभदेव जी का ७,
मुनीसुव्रत जी का बे चन्द्रप्रभु जी का ५, सुमतिनाथ जी का ३,
सामलीया पार्श्वनाथ जी का २, नेमनाथ जी को १, सुमतिनाथ जी
का २, चामुख महावीर जी को १, हसनाथ जी को १, वासपूज
जी को १, वभननाथ जी को १, धर्मनाथ जी को १, मन्दीर स्वामी
का १, नामीनाथ को १, सामलीया चन्तामण ३, जीराउला
पार्श्वनाथ जी को १, अभिनन्दन जी को २, अनन्तनाथ २, गाम
सूनेद मा देवरा ४, गन्तनाथ जी को सहसफणा पार्श्वनाथ जी को
सामलीया पार्श्वनाथ जी को श्रीयास जी को। गाम सीयोर
मा देवरो १, वासपूज जी को। गाम १, बीरूॅ तेमा कुन्थनाथ जी
को देवरो १, गाम १, सुटनगर मे देहरा ३, अजितनाथ जी को
१, ऋषभदेव जी का २, गाम सुराई चन्द्राप्रभु जी को देहरी १।
गाम १ सोपर जीरावला पार्श्वनाथ जी रो देहरो १, गाम
१, बकायण सम्भवनाथ जी रो देहरो, गाम १, साचोर, तेहमे
सन्तनाथ जी रा देहरा २, महावीर जी ना देहरा ३ पारसनाथ
जी रो १ गाम १ मरेट नवाव की, तेहमे देहरा १८, ऋषभदेव जी
को १, सन्तनाथ जी का २, अजितनाथ जी का १, सम्भवनाथ
जी को १, अभिनन्दन जी को ', सुमतिनाथ जी को १, पदमप्रभु