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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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परिशिष्ट २७३

पार्श्वनाथ जी का देवल १, दादा पार्श्वनाथ जी को दादाजी का
पगल्या उपर देरी जिनचन्दसूर, कुसलगुर थूलभद्र। फेर कतार
गाम देवरो पार्श्वनाथ जी को गिखरबद्ध, तिहाथी तापी पार
गाम रानेर देवरा ४ रखिवदेव जी रा २, सतिनाथ जी रो १,
नेमनाथ जी रो अभिनन्दन जी का देवल २ ।
निह्राति गाम भकअच आव्या, गाउ १०, तिहा देवरा ९
शखेसर जी को १, उपर गोरी पार्श्वनाथ जी को, हेठे सामलीआ
पार्श्वनाथ को, ते उपर मनमोहन पार्श्वनाथ जी को एक रीखव-
देव जी को पुरा मे १, सेर मा रीखवदेव जी रो १, सातिनाथ जी
रो १, पार्श्वनाथजी रो १, सैसफणा पार्श्वनाथ जी रो, तिहा से
मीयागाम तीहा देवरा ४, शातिनाथ जि रा २, रीखभदेवजी रो १,
चन्दाप्रभुजी चोवीसी भायरा मा, तिहा से पाट्ठरो ते मद्दे देवल २,
सातिनाथ जी को १, चन्दाप्रभुजी रो १, तिहाथी चाल्या गाम
पदसरोत मद्दे देवल २ सतनाथ जी रा, तिहा से बरोदडो ते मद्दे
देवरा १३, दादा पार्श्वनाथ को १, उपर समेतशिखर जी को
चौमुख धातु का सतनाथ जी का २, रोखभ देवल १, गोरी
पार्श्वनाथ जी को १, मन मनोर पार्श्वनाथ रो १, सहसफणा
पार्श्वनाथ जी रो, देवल १, चिंतामण पार्श्वनाथ जी रा देवल २,
संभवनाथ रो १ चन्द्राप्रभु जी रो १, वासपूज जी रो १, सीतल
नाथ जि रा १, तिहाथी गाऊ १, गाऊ ३ नाथपुरो तिहा देवरा २
संतनाथ जी का १, करला पार्श्वनाथ जी रो १, तिहाथी गाउ ९,
डाभोई तिहा देवरा ९, वैदुका पार्श्वनाथ जी १, सतनाथ जी
को १, अजितनाथ जी का २, रखवदेव जी का १, गोरी पार्श्व-
नाथ जी का १, सामलिया पार्श्वनाथ जी को १, शीतलनाथ जी
का १, चोउमुखजि धातु को १, तिहाथी चाल्या गाउ गाम १,
पर बादर तिहा देवरा ७, सातनाथ जी रो १, रखवदेव जी रो १,
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