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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 355, कुल 442 में से

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पृष्ठ 355

२७२ विविध तीर्थ-कल्प

आगल चाल्या त्या मुनोसर का पगला छे, खेतपाल छे । ते आगल
गउ १ पाचमी टुक छे । पाँच हजार त्रण से सतरे पावढीया छे,
ते ऊपरे पाचमी टुक छे त्या पगला छे मोक्षकल्याणक थयु छे ।
तिहाथी गाउ ७, धाराजि गाम छे । देरा त्रण एक ऊपर छे
ऋषभदेव नो १, सांतिनाथनो १, सुपाश्र्वनाथ चोमक जि, तिहाथी
७, गाऊ अमरेली देरी १, ऋषभदेव को, तिहाथी १८, गाळ
नवुनगर देरा ९, ऋषभदेवजी चन्द्रप्रभु जि सतीनाथ जि सामलीया
पार्श्वनाथ जी सतिनाथ जी वासपूज जी नेमनाथ जी सीतलनाथ
जी ऊपर गोडी पार्श्वनाथ जी ८। नवानगर थकि गाळ १२ गाम
भाड़वण देवल २, गोडी पार्श्वनाथ जी सतिनाथ जि, वासे गाम
पोरबंदर गाउ १२ तेमे देरा ३, सतिनाथ को रिषभदेव जो
चन्द्रप्रभु जि उपासरा मध्ये पद्मप्रभु जो वासुपूज्य जी, तिहसे
विरचन्द्र जी का वाण मे चडा, दिन ४ मा उतरा, सेर मुंबाई
वन्दर देवरा ३, गोड़ि पार्श्वनाथ जो, सतीनाथ जी का २ ।
तिहाथी चाल्या गाम पालड़ी मद्दे देवल १, चन्दाप्रभु जो को,
तिहाथी गाम १, छन्जोइयो ते मद्दे देरो १, चतामण पास को, तिहा
थोसूरत आव्या । ते मद्दे देवल १, सखेसर जी को ते मद्दे भमति
ते ऊपर महावीर जी का देवल २, अजितनाथ जी का देवल ३,
गौडी पारसनाथ जी का देवल ३ फेर पार्श्वनाथ जी का ३, मन
मोहननाथ जी का देवल १, अनंतनाथ जो का देवल १, अनत-
नाथ जी का देवल १, श्री रीहस रो देवल १, समतिनाथ रो
देवल १, पद्मप्रभु रो देवल १, अभिनंदन जी रो देवल १, सुपार्र्श्व-
नाथ जी रो देवल १, सतनाथ जी को देवल ७, सभवनाथ जी का
देवल २, वभवनाथ जी का देवरा २, धरमनाथ जी का देवरा २,
वासपूज जी का देवरा ३, ऋषभदेव जी का देवरा छे ६, सहस-
फणा पार्श्वनाथ जी का देवल २, मुनिसुव्रत जी का २, वीलोकि