सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 354, कुल 442 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 354

[Page Header]
परिशिष्ट २७१

सभवनाथजी को चन्द्रप्रभुजी को दादा पार्श्वनाथजी को सातनाथ
जी को नेमना (थ) जी को सासनदेवी को राजन देवी को
त्याथी वेरावल बदीर छे ते मध्ये देवल त्रण छे १ चिंतामणी पार्श्व-
नाथजी को सीतलनाथजी को एक चंद्राप्रभु जी को त्याथी गाउ
सात चोरवाड़ गाम छे त्या चिंतामण पार्श्वनाथजी को देवल छे
सीखरबंधु त्याथी गउ ४ मागरोल वदीर छे । ते मध्ये डेरा
४ छे नवपात्रव पार्श्वनाथजी एक चिन्तामण पार्श्वनाथजी एक
सुपार्श्वनाथजी एक चौमुख जी छे । उपर, त्याथी गउ १० बनथली
छे डेरो १ सीखरबद्ध छे, मनमोहन पार्श्वनाथजी छे । त्याथी
गउ ५, जीर्णगढ गाम छे, ते गाम हेठलें देवल २ छे । १ नेमनाथ
जी, १ चोमुखजी ते उपर गउ ३, चढीये त्यार गिरनार जी आवे
त्या नेमनाथ जी का चरण हे, एक वावडी हे । त्याथी गउ २
उपर चढीये, त्या दरवाजे जक्ष जक्षणी नी चोकी छे, ते आगले
सीपाई की डोढी है, ते आगलें रतनपोल है तेमा नेमनाथ जी के
देरो छे, भमती छे केसरी चकेसरी देवी छे, चोवीसी छे, सिद्धचक्र
जी ना पगला छे, सासनदेवी छे ति आगले अदबद जी को डेरो
छे, सामने चौरासी गणधर का पगला छे, ते अगले क्षेमधर
स्वामी को देवल छे, तीन अष्टापद जी को देवल छे, बाहूबल जी
की देरो, जीवत स्वामी जी को देरो, रिषभनाथ जी को देरो,
अमीझरा पार्श्वनाथ जी को देरो छे । गोडी पार्श्वनाथ जी को
देवल छे, सतनाथ जी को २ वभनाथ जी को छे, चोमुख जी
नेमी मनमी धर्मनाथ जी को राजुल की गुफा, सामलिया पार्श्व-
नाथ जी को सहस्र फण । पार्श्वनाथ जी को, सुधर्मा स्वामी,
मेरु पर्वत, सहस्र कोट, त्याथो सेहसा वन मध्ये दीक्षा कल्याणक,
केवल कल्याणक पगला, ते ऊपर छत्री छे, हेठल कुंड छे, तेमा
नीझरण आवे छे, ते ऊपर गउमुखी छे, त्या गणधर जी का पगला
छे, हेठे हनुमान छे, ऊपर चढ्या मा अम्बिका को देवल छे, ने