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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 353

२७० विविध तीर्थ-कल्प

दरगन करी उतर सरवत लेवै आर पाणी करं तिहाथी भूषण
सानी वावडी है ते उपर ९ साधुनी देरी छे ते मध्ये पगल्या छे ते
हेठे देरी पाच मध्ये पगल्या छे ते पास वाडी मध्ये माहादेवजी को
देवल छे सामे वावडी छे मारग मे ते सामने दादाजी की खत्री छे
ते पासे कुओ छे कुआ पास फुलवाड़ी छे ते हेट्ठे तरकाई छे माथे
दो देरी छे ते माथे गाम पालीताणु छे ते मद्दे रीखवदेवजी रो
देवल १ सीखरवद्ध छे । ते पासे उपासरो छे विजैदेवसूरि नो मद्दे
माणभद्रजि छे । दिजोषड्तर नो उपासरो छे, त्रीजो अचलगछ ना
छे । आणंदजी कल्याणजी नो भंडार छे । बीजु धरमगाला ५ ,
वरडो १ संघ उतरवाने पांजरापोल १ सदावृत्त ८ ।
ऐतनी जात्रा धर्मचंदजी करमचंदजी मुखदावादका सघ की
सादे आआ सा सीवलाल जात्रा करवा रहा, चउमुखजी को काम
बनायो, महीना सवा चार रहा, जात्रा १२१ करी ने उपडा । मवे
महाबीर की जातरा करवा गया । देवल १ महावीरजी को
भोआरा मद्दे उपर पदमावती देवी, पछे गाम उनो तिहा देवरा
५ रखवदेवजी की अमीझरा पार्श्वनाथजी को १ सतनाथजी को
१ नेमनाथजी को १ सीताउनाथजी को तिहाथी कोस १ आचारज
उपाध्यानी देरी ७ मद्दे पगल्या छे । तिहाथी गाउ १ गाम छे त्या
अझारा पार्श्वनाथजी को देवल छे, गाम मध्ये सिखरवद्ध त्याथी
गाउ १ गाम छे त्याहा देवलचिंतामणि पार्श्वनाथजी छे । त्याहा
थी गाउ २ दरियाउ छे ते मध्ये दीवसेरे छे । ते मध्ये देवल त्रण
छे । देवल १ नवखडा पार्श्वनाथजी को १ नेमनाथजी को १
सुपार्श्वनाथजी १ महावीर स्वामी छे ।
त्याथी वाण मे बैठा सा वीरचंद वेसाड्या, पोताना भाई नी
वउ साथे, बेठी ने पाटण उतरथा । पाटण मध्ये ओली करी, त्या
देवल १० छे ऋषभदेवजी को अजीतनाथजी को महावीरजी को