विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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७४६ विविध तीर्थ-कल्प
धारण किया हुआ है । उनका शरीर तपे हुए सोने जैसा है । वह
श्री नेमिनाथ भगवान की शासनदेवी है और गिरनार शिखर पर
उसका निवास है । उसके मुकुट, कुण्डल, मुक्ताहार, रत्नकंकण,
तुपूरादि सर्वागाभरण रमणीक हैं । वह सम्यग्दृष्टियो के मनोरथ
पूर्ण करती है, विघ्नसमूह दूर करती है । उस देवी का मन्त्र
मण्डलादि रचनापूर्वक आराधन करने वाले भव्यो के अनेक
प्रकार की ऋद्धि-समृद्धि देखी जाती है एवं उनका भूत, पिशाच,
डाकिनी और दुष्टग्रह पराभव नही करते । पुत्र, कलत्र, धन-धान्य,
राज्य श्रीसम्पन्न होता है । अम्बिका मंत्र यह है—
वयवोयम कुल कुलजलहरिहय अवक्कततत्त पेआड ।
पणइणिवायावसिओ अविअदेवीइ अहमंतो ॥ १ ॥
धुवभुवण देवि संबुद्धिपास अकुस तिलोअ पंचसरा ।
णहसिहि कुलकल अत्भासिअमाया परप्पणामपय ॥ २ ॥
वागुब्भव तिलोअ पास सिणीहाओतडअवन्तस्स ।
कूड च अविआए नमुत्ति आराहणा मत्तो ॥ ३ ॥
इस प्रकार अम्बिका देवी के बहुत से मंत्र स्वपर की रक्षा
करने वाले स्मरणयोग्य मार्ग-क्षेमादि गोचर हैं । उन मन्त्रो को व
मण्डल को यहाँ विस्तार भय से नही कह रहे, जिज्ञासुओ को
गुरुमुख से जानना चाहिए ।
यह अम्बिका देवी का कल्प अविकल्पचित्तवृत्ति वाले, वाचने
सुनने वाले समीहित अर्थ से पूर्ण होते हैं ।
अम्बिका देवी का यह कल्प समाप्त हुआ । इसकी ग्रंथ-संख्या
४७ व अक्षर अधिक है ।