विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
पृष्ठ 313, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें२३० विविध तीर्थ-कल्प
भगवान का च्यवनकल्याणक है। सप्तमी को विमलनाथ का
निर्वाण, नवमी के दिन नमिनाथ प्रभु की दीक्षा हुई। शुक्ल छठ
को वीर प्रभु का च्यवन और अष्टमी के दिन श्री नमिनाथ का
निर्वाण हुआ।
आषाढ शुक्ल चतुर्दशी के दिन श्री वासुपूज्य स्वामी सिद्ध
हुए। श्रावण कृष्ण तृतीया को श्रेयासनाथ का निर्वाण हुआ।
सप्तमी के दिन अनन्तनाथ का च्यवन, अष्टमी को नमिनाथ का
जन्म, नवमी को कुन्थुनाथ का च्यवन और शुक्ल द्वितीया को
सुमतिनाथ जी की दीक्षा हुई।
श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन नेमिनाथ भगवान का जन्म और
दीक्षा, अष्टमी को पार्श्वनाथ जी का निर्वाण एव पूर्णिमा को
मुनि सुव्रत भगवान का च्यवन हुआ। भाद्रपद कृष्ण सप्तमी को
शान्तिनाथ जी का च्यवन और चन्द्रप्रभ का मोक्ष हुआ। अष्टमी
के दिन सुपार्श्वनाथ तीर्थंकर का च्यवनकल्याणक है।
भाद्रपद शुक्ल नवमी को सुविधिनाथ जिनेश्वर का निर्वाण
हुआ। आश्विन कृष्ण अमावस्या को नेमिनाथ भगवान केवली
हुए। पूर्णिमा को नमिनाथ का च्यवन कल्याणक है।
श्री सोमसूरि स्तवना करते हुए कहते है कि वे हमे मंगल-
कारी हो।
श्री सोमसूरि द्वारा कृत कल्याणकस्तवन समाप्त हुआ। यह
२० काव्यो मे है।