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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 312, कुल 442 में से

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पृष्ठ 312

पञ्चकल्याणक-स्तवन २२९
चैत्र गुक्ल नवमी के दिन सुमतिनाथ का निर्वाण और ग्यारस
को केवलज्ञान हुआ। त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर का
जन्मोत्सव हुआ। पूर्णिमा के दिन पद्मप्रभ को केवलज्ञान हुआ।
वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन कुन्थुनाथ भगवान का निर्वाण
हुआ।
वैशाख कृष्ण द्वितीया को शीतलनाथ का निर्वाण, पचमी को
कुन्थुनाथ की दीक्षा, और छट्ठ के दिन गीतलनाथ का च्यवन
हुआ। दगमी के दिन नमिनाथ का मोक्ष, त्रयोदशी की अनन्तनाथ
का जन्म और चतुर्दशी को उनकी दीक्षा और केवलज्ञान
कल्याणक हुआ।
वैशाख कृष्ण चतुर्दशी के दिन निर्मल चित्त वाले कुन्थुनाथ
भगवान का जन्म और गुक्ल चतुर्थी को अभिनन्दन का च्यवन
हुआ। सप्तमी के दिन धर्मनाथ तीर्थंकर का च्यवन और अष्टमी
के दिन अभिनन्दन स्वामी का निर्वाण हुआ।
वैशाख शुक्ल अष्टमी को सुमतिनाथ का जन्म और नवमी को
दीक्षा हुई। दगमी के दिन महावीर स्वामी को केवलज्ञान प्राप्त
हुआ। द्वादशी के दिन विमलनाथ का एव त्रयोदशी को अजितनाथ
का च्यवनकल्याणक है। ज्येष्ठ वदि छठ को श्रेयासनाथ का
च्यवन हुआ।
ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को मुनि सुव्रत का जन्म और नवमी के
दिन निर्वाण हुआ। त्रयोदशी के दिन शान्तिनाथ स्वामी का जन्म
एव निर्वाण हुआ एव चतुर्दशी को उन्ही का दीक्षा कल्याणक है।
गुक्ल पचमी को धर्मनाथ स्वामी का निर्वाण और नवमी को
वासुपूज्य जिनेश्वर का च्यवनकल्याणक है।
ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी को सुपार्श्वनाथ जी का जन्म और
त्रयोदशी को दीक्षा हुई। आपाढ कृष्ण चतुर्थी को ऋषभदेव