विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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निर्वाण प्राप्त हुए। अमावस्या के दिन श्रेयांसनाथ को केवल-
ज्ञान हुआ।
माघ शुक्ल दूज के दिन अभिनंदन का जन्म और वासुपूज्य
का केवलज्ञान ये दो कल्याणक हुए। तृतीया के दिन धर्मनाथ
और विमलनाथ जिनेश्वर का जन्म हुआ। चतुर्थी के दिन विमल-
नाथ की दीक्षा हुई और सुदि अष्टमी को अजितनाथ का जन्म
हुआ।
अजितनाथ स्वामी ने माघ शुक्ल नवमी को दीक्षा ली और
बारस को अभिनंदन स्वामी की दीक्षा एव धर्मनाथ जिनेश्वर की
दीक्षा भी तेरस को प्रसिद्ध है। फाल्गुन कृष्ण छठ को सुपार्श्वनाथ
को केवलज्ञान और सप्तमी को निर्वाण हुआ। उसी दिन चन्द्रप्रभ
भगवान को केवल ज्ञान हुआ।
फाल्गुन कृष्ण नवमी को सुविधिनाथ का च्यवन और ग्यारस
के दिन ऋषभदेव को केवलज्ञान हुआ। श्रेयांसनाथ का जन्म
और मुनि सुव्रत का केवलज्ञान बारस के दिन हुआ। त्रयोदशी
को श्रेयांसनाथ भगवान ने चारित्र लिया। चतुर्दशी वासुपूज्य का
जन्म और अमावस्या के दिन दीक्षाकल्याणक है।
फाल्गुन शुक्ल दूज को अरनाथ जिनेश्वर का च्यवन हुआ।
चतुर्थी को मल्लिनाथ और अष्टमी को सभवनाथ जी का च्यवन
कल्याणक है। बारस के दिन सुमतिनाथ की दीक्षा और मल्लिनाथ
जिनेश्वर का निर्वाण हुआ। चैत्र कृष्ण चतुर्थी को पार्श्वनाथ
भगवान का केवलज्ञान और च्यवनकल्याणक है।
चैत्र कृष्ण पचमी को चन्द्रप्रभ भगवान का च्यवन, अष्टमी के
दिन ऋषभदेव प्रभु का जन्म, और दीक्षाकल्याणक हैं। चैत्र शुक्ल
तृतीया को कुन्थुनाथ का केवल ज्ञान, पचमी को अनतनाथ का
अजितनाथ का और सभवनाथ का भी निर्वाण हुआ।