विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६. पञ्चकल्याणक-स्तवन
जिनेश्वर भगवान को नमस्कार करके उन्ही के च्यवन-जन्म-
दीक्षा-ज्ञान और निर्वाण के पंच कल्याणको का कीर्त्तन करता हूँ।
कार्त्तिक कृष्ण ५ को सभवनाथ का, वारस को नेमिनाथ का च्यवन
और पद्मप्रभ का जन्म हुआ।
तेरस को पद्मप्रभ की दीक्षा, अमावस्या को वीर प्रभु का
निर्वाण, काती सुदि तीज को सुविधिनाथ का और अरनाथ
स्वामी का वारस को निर्वाण हुआ। मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी को
सुविधिनाथ का जन्म, छठ के दिन सुविधिनाथ की और दगमी
को महावीर स्वामी की दीक्षा हुई।
मार्गशीर्प वदि ग्यारस को पद्मप्रभ का मोक्ष, सुदि दशमी को
अरनाथ का मोक्ष और जन्म हुआ। ग्यारस को अरनाथ की दीक्षा,
मल्लिनाथ का जन्म दीक्षा और ज्ञान, नमिनाथ का भी केवल-
ज्ञान हुआ।
मार्गशीर्ष शुक्ल १४ जन्म और पूर्णिमा को संभवनाथ की
दीक्षा हुई। पोप कृष्ण १० को पार्श्वनाथ का जन्मोत्सव हुआ।
ग्यारस को पार्श्वनाथ की दीक्षा, वारस को चन्द्रप्रभ का जन्म और
तेरस के दिन दीक्षा हुई।
पौष कृष्ण चतुर्दगी को गीतलनाथ को केवलज्ञान उत्पन्न
हुआ। पोष सुदि ६ को विमलनाथ और नवमी के दिन गान्तिनाथ
ने दीक्षा ली। सुदि चतुर्दशी को अभिनन्दन एव पूर्णिमा को धर्म-
नाथ का मनुष्यो को आनन्द देने वाला केवलज्ञान हुआ।
माघ कृष्ण छठ को पद्मप्रभ का च्यवन, वारस को गीतलनाथ
का जन्म और दीक्षा दो कल्याणक हुए। ऋषभदेव त्रयोदगी को