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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 3, कुल 442 में से

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पृष्ठ 3

( घ )
इसलिए इसका हिन्दी अनुवाद प्रकाशित किया जाना बहुत
आवश्यक था ।
बडे हर्ष का विषय है कि श्री अगरचन्द जी नाहटा के साहित्य
सहयोगी उनके भतीजे श्री भंवरलाल जी नाहटा ने उक्त ग्रन्थ का
हिन्दी अनुवाद कड़ी मेहनत व लग्न के साथ कर इस तीर्थ को
प्रकाशन का अवसर दिया जिसके लिए हम उनके बहुत आभारी
हैं । इस ग्रन्थ की भूमिका तैयार करने व परिशिष्टों की सामग्री
जुटाने मे श्री अगरचन्द जी नाहटा का प्रशमनीय महयोग रहा है ।
ग्रन्थ की प्रस्तावना लिखने मे डाक्टर ज्योतिप्रसाद जी जैन का
भी सराहनीय कार्य रहा हैं । इस ग्रन्थ मे छपे चित्रो के लिए
ब्लाक उपलब्ध करवाने मे श्री गणेश ललवाणी ( जैन भवन
कलकत्ता ) एव श्री महेन्द्र कुमार सिन्धी, कलकत्ता का भी सरा-
हनीय सहयोग रहा है । तीर्थ की ट्रस्ट कमेटी इन सभी महानुभावो
के प्रति अपना हार्दिक आभार प्रकट कग्ती है ।
विविध तीर्थकल्प अपने ढग का एक ही ग्रन्थ हैं । इसको
सुसम्पादित करके गुजराती भाषा मे प्रकाशित करवाने वाले मुनि
श्री जिनविजय जी ने इसके महत्त्व पर अच्छा प्रकाश डाला है ।
उनके वक्तव्य का आवश्यक अंश इस ग्रन्थ मे अन्यत्र उद्धृत किया
गया है ।
तीर्थ की ट्रस्ट कमेटी शीघ्र ही "जैन कथा सचय" नाम का
एक और प्रकाशन करने जा रही है जिसका सम्पादन स्वय श्री
अगरचन्द जी नाहटा कर रहे हैं ।
नाकोडा तीर्थ के सम्बन्ध मे एक प्रामाणिक सचित्र इतिहास की
भी माग श्रद्धालुओ की ओर से काफी समय से आ रही थी । इस
सम्बन्ध मे भी महोपाध्याय विनयसागर जी से नाकोडा तीर्थ का
इतिहास लिखवाया जा रहा है ।