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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 274

चौरासी तीर्थनामसंग्रह-कल्प १९३
के श्री माणिक्यस्वामी ऋषभदेव । गगा यमुना के वेणी सगम पर
श्री आदिकर मण्डल तीर्थ है ।
२ अयोध्या मे श्री अजितनाथ, चन्देरी मे श्री अजितनाथ,
तारण तीर्थ की विश्वकोटिशिला पर श्री अजितनाथ, अगदिका मे
श्री अजित-शांति दो तीर्थंकर ब्रह्मेन्द्र के देहरासर के हैं ।
३ श्रावस्ती मे जागुली विद्यापति श्री संभवनाथ है ।
४ सेगमती गाँव मे श्री अभिनन्दन देव हैं । नर्मदा नदी उन्ही
के चरणो मे से निकली है ।
५ क्रौंच द्वीप, सिंहल द्वीप, हंस द्वीप मे श्री सुमतिनाथ देव
की पादुका हैं । आवुरिणि गाँव मे श्री सुमतिनाथ देव हैं ।
६ माहेन्द्र पर्वत और कौशाम्बी मे श्री पद्मप्रभ है ।
७ मथुग मे महालक्ष्मीनिर्मित श्री सुपार्श्व-स्तूप है । दशपुर
नगर मे सीता देवी के देहरासर के श्री सुपार्श्वनाथ हैं ।
८ प्रभास मे शशिभूषण श्रीचन्द्रप्रभ स्वामी की चन्द्रकान्त
मणिमय प्रतिमा श्री ज्वालामालिनी देवी के देहरासर की है ।
वल्लभी में आई हुई, श्री चन्द्रप्रभ स्वामी की प्रतिमा नन्दिवर्द्धन
राजा की बनवायी हुई और श्री गौतमस्वामी द्वारा प्रतिष्ठित है ।
नाशिक मे जीवितस्वामी त्रिभुवनतिलक श्री चन्द्रप्रभ हैं ।
चन्द्रावती के मन्दिर में मुकुटसदृश श्री चन्द्रप्रभ है । वाराणसी
के विघ्नेश्वर मे भी श्री चन्द्रप्रभ भगवान है ।
९ कायाद्वार मे श्री सुविधिनाथ भगवान है ।
१० प्रयाग तीर्थ मे श्री शीतलनाथ है ।
११ विन्ध्याचल और मलयगिरि पर श्री श्रेयासनाथ
भगवान है ।
१२ चम्पानगर में विश्वतिलक श्री वासुपूज्य है ।
१३ कम्पिला जी तीर्थ में गगातट पर एव श्रीसिंहपुर मे श्री
विमलनाथ हैं ।
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