विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४५. चौरासी तीर्थ-नामसंग्रह-कल्प
जिन्होने पाप का निग्रह कर दिया है ऐसे पंच परमेष्ठी की
उपासना करके तत्र जानने वालो को विदित 'चौरासी तीर्थ जिन'
नाम का संग्रह करता हूँ ।
जैसे कि शत्रुञ्जय परभुवन मे दीपक के तुल्य श्री वज्रस्वामी
प्रतिष्ठित श्री आदिनाथ एवं पांडवो द्वारा स्थापित श्री मूलनायक
नन्दिवर्द्धन युगादिनाथ, श्री शांतिनाथ, पुण्डरीक, श्री कलश
प्रतिष्ठित और दूसरे श्री वज्रस्वामी प्रतिष्ठित पूर्ण कलश ।
सुधाकुण्ड जीवित स्वामी श्री शांतिनाथ और अवसर्पिणी मे भरत
क्षेत्र से प्रथम सिद्ध होने वाली माता मरुदेवी स्वामिनी ।
श्री उज्जवन्त गिरनार पर पुण्य कलश-मदन मूर्त्ति श्री नेमि-
नाथ, कच्चन वालानक मे अमृतनिधि श्री अरिष्टनेमि, पापा मठ मे
अतीत चौवीसी मे से श्री नेमीश्वरादि आठो पुण्य के निधान है ।
१ कायद्रा मे त्रिभुवन मंगल कलश श्री आदिनाथ । पारकर
देश मे आदिनाथ, अयोध्या मे श्री ऋषभदेव, कोलापुर मे वज्र-
मिट्टमय श्री भरतेश्वरपूजित भुवनतिलक श्री आदिनाथ, सोपारक
मे जीवंत स्वामी श्री ऋषभदेव प्रतिमा । नगरमहास्थान मे
श्री भरतेश्वर द्वारा कारित युगादि देव, दक्षिणापथ मे गोमटदेव श्री
बाहुबली, उत्तरापथ मे कलिंग देश मे गोमट श्री ऋषभदेव,
खंगारगढ मे श्री उग्रसेन द्वारा पूजित पृथ्बी के मुकुट श्री आदिनाथ,
महानगरी के उद्दण्डविहार मे श्री आदिनाथ, पुरिमताल मे श्री
आदिनाथ, तक्षशिला मे बाहुबलि का बनवाया हुआ धर्मचक्र ।
मोक्षतीर्थ मे आदिनाथपादुका, कुल्पाक में मन्दोदरी के देहरासर