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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 253, कुल 442 में से

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पृष्ठ 253

१७० विविध तीर्थ-कल्प
वायुभूति, (४) व्यक्त, (५) सुधर्मा स्वामी, (६) मण्डित, (७) मोरिय-
पुत्र, (८) अकम्पित, (९) अचलभ्राता, (१०) मेतार्य और (११)
प्रभास ।
(२) स्थान—इन्द्रभूति आदि तीन सहोदर मगधदेश के गोव्वर
गाँव मे उत्पन्न हुए । व्यक्त और सुधर्मा स्वामी कोल्लाग सन्निवेश
मे, मण्डित और मोरियपुत्र दोनो मोरिय सन्निवेश मे, अकम्पित
मिथिला मे, अचलभ्राता कोगला मे, मेतार्य वत्सदेश के तुगिय
सन्निवेश मे और प्रभास स्वामी राजगृह मे उत्पन्न हुए ।
(३) पिता—तीन सहोदरो के पिता वसुभूति, व्यक्त का
धनमित्र, आर्य सुधर्मा का धम्मिल, मण्डित का धनदेव, मोरिअ-
पुत्र का मोरिय, अकम्पित के पिता देव, अचल भ्राता के वसुदत्त,
मेतार्य के दत्त, और प्रभास स्वामी के पिता का नाम बल था ।
(४) माता—तीन भ्राताओ की जननी पृथ्वि, व्यक्त की
वीरुणी, सुधर्म धी भद्दिला, मण्डित की विजयादेवा एवं मोरिअ-
पुत्र की भी वही—क्योकि धन देव के परलोक गत होने से मोरिअ
ने उसे सगृहीत किया क्योकि उस देश मे ऐसा होना र्निविरोध
था । अकम्पित की जयन्ती, अचलभ्राता की नंदा, मेतार्य की
वरुणदेवा और प्रभास की माता अतिभद्र थी ।
(५) नक्षत्र.—इन्द्रभूति का ज्येष्ठा, अग्निभूति का कृत्तिका,
वायुभूति का स्वाति, व्यक्त का श्रवणा, सुधर्मा स्वामी का उत्तरा-
फाल्गुनी, पण्डित का मघा, मोरिअपुत्र का मृगगिरा, अकम्पित
का उत्तराषाढा, अचलभ्राता का मृगशिरा, मेतार्य का अश्विनी,
प्रभास का पुष्य नक्षत्र था ।
(६) गोत्र—तीनो भाई गौतम गोत्रीय, व्यक्त भारद्वाज-
गोत्रीय, सुधर्मा स्वामी अग्निवेश्यायन गोत्रीय, मण्डित वाशिष्ठ
गोत्रीय, मोरिअपुत्र काश्यपगोत्रीय, अकम्पित गौतमगोत्रीय,