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सर्वकोश
विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 193

धानियाँ है। वे लाख योजन लम्बी-चौडी और जिनायतनोसे भूपित
हैं। (३३-३४)
उनके नाम क्रमश १ सुजाता, २ सौमनसा, ३ अर्चिमाली,
४ प्रभाकरा, ५ पद्मा, ६ शिवा, ७ शुचि, ८ अजना, ९ चूता,
१० चूतावतंशिका, ११ गोस्तूपा, १२ मुदर्शना, १३ अमला,
१४ अप्सरा, १५ रोहिणी, १६ रत्ना, १७ रत्नोच्चया, १८ सर्व-
रत्नसञ्चया, १९ वसु, २० वसुमित्रिका, २१ वसुभागा, २२ वसु-
न्धरा, २३ नन्दोत्तरा, २४ नन्दोतर कुरु, २५ देवकुरु, २६ कृष्णा,
२७ कृष्णरात्रि, २८ रामा रामरक्षिता (३५-३६-३७-३८) हैं।
सर्व ऋद्धिवाले सपरिच्छद देवगण श्री तीर्थंकर-अर्हन्तो की
पुण्यतिथियो मे उन चैत्यो मे अष्टाह्निका महोत्सव करते हैं (३९)।
पूर्व के अञ्जनगिरि पर चार द्वार वाले जिनालय मे शास्वती
प्रतिमाओ का श