विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६. हस्तिनापुर-कल्प
गजपुर (हस्तिनापुर) स्थित श्री शान्तिनाथ, कुन्थुनाथ,
अरनाथ और मल्लिनाथ स्वामी को नमस्कार कर के हस्तिनापुर
तीर्थ का कल्प सक्षेप से कहता हूँ ।
श्री आदीश्वर भगवान तीर्थंकर के भरत और बाहुबली नाम
के दो पुत्र थे । भरत के सहोदर अठाणवे कुमार थे । भगवान ने
दीक्षा लेते समय भरत को अपने पद पर अभिषिक्त किया और
बाहुबली को तक्षशिला दी, बाकी पुत्रो को भी उन देशो मे
राज्यादि दिए । अग कुमार कें नाम से अग देश हुआ, कुरु के
नाम से कुरुक्षेत्र प्रसिद्ध हुआ । इसी प्रकार वग, कलिङ्ग, सूरसेन,
अवन्ती आदि हुए । कुरु राजा का पुत्र हस्ति नामक राजा हुआ
उसने हस्तिनापुर बसाया । वहाँ भागीरथी महानदी पवित्र जल
से पूर्ण प्रवाहित है ।
वहाँ सोलहवे शान्तिनाथ, सतरहवे कुन्थुनाथ, अठारहवे
अरनाथ तीर्थङ्कर हुए । इन्होने क्रमशः पाँचवे, छठे और सातवें
चक्रवर्ती हो कर छ खण्ड भर