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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 95

५० भूमिका
प्रजनार्थं महाभागा पूजार्हा गृहदीप्तयः ।
स्त्रियः श्रियश्च गेहेषु न विशेषोऽस्ति कश्चन ॥
हे पुरुषो ! संतानोत्पत्ति के लिये महा भाग्योदय करने वाली
पूजा के योग्य गृहस्थाश्रम को प्रकाश मय करती हुई सतानोत्पत्ति
करने कराने वाली घरों मे स्त्रियां ही हैं। वे श्री अर्थात् लक्ष्मी स्वरूप
होती हैं । लक्ष्मी और स्त्रियों मे कुछ भी भेद नहीं है । क्योंकि
दोनो से ही घर की समान शोभा है ।
अपत्यं धर्मकार्याणि शुश्रूषा रतिरुत्तमा ।
दाराधीनस्तथा स्वर्ग पितॄणामात्मनश्चहि ॥
इसका अर्थ यह है कि संतानोत्पत्ति, धर्म कार्य, उत्तम सेवा
और रति सुख आदि तथा अपना और पितरो का जितना सुख
है वह सब स्त्री ही के आधीन होता है ।
इसलिये अपनी शुभ कामना चाहने वाले तथा आरोग्य
दीर्घजीवी होकर उत्तम संतति की इच्छा रखने वाले और मनुष्य
जीवन का आनन्द तथा सुख चाहने वाले पुरुषो को हर प्रकार
से स्त्रियों को प्रेम पूर्वक रखकर प्रसन्न रखना चाहिये। केवल उन्हे
विषय भोग की सामिग्री समझ कर रतिक्रिया की ही मशीन न
समझनी चाहिये । अपनी आरोग्यता तथा स्त्री की आरोग्यता के
लिये, दोनो के दीर्घजीवन के लिये नियम पूर्वक रतिक्रिया कर
उत्तम संतान उत्पन्न करनी चाहिये । तभी जीवन का सच्चा सुख
और आनन्द प्राप्त होता है ।