विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसीता और रावण का सम्वाद ५१
सीता और रावण का सम्वाद
दाम्पत्य प्रेम के लिये आवश्यक है कि अपनी स्त्री के बिना
दूसरी स्त्री का सर्वदा त्याग रक्खे। वैसे ही स्त्री भी अपने विवा-
हित पुरुष को छोड़कर अन्य पुरुषों से सदैव पृथक रहे। परस्त्री
गमन से बड़े २ धीर वीर विद्वानों का भी तेज नष्ट हो जाता है
रावण को देखिए जब वह हत तेज होकर भिखारी के रूप में
सीता के सामने आया फिर जब उन्हें जबर्दस्ती उठाकर लेगया
और धमकाया तो सीता जी क्या उत्तर देती हैं:—
क्रोधातुर दशशीस, जानकी-निकट खडा हो,
डरता बोला किन्तु, प्रकट में बड़ा कड़ा हो।
सीते ! मुझको देख, तुझे डरना न चाहिये,
बनवासी के लिये, व्यर्थ मरना न चाहिये ॥
यद्यपि राक्षसों के लिये, कुछ भी नही अधर्म है,
तो भी तुझे प्रसन्न ही, रखना मेरा कर्म है।
सीते मुझको मान, तुझे भी मान मिलेगा,
अपमानित कर मुझे न, तेरा काम चलेगा ॥
भोग योग्य नृपसुते ! वृथा हठ योग न कर तू,
मुझे समझ निज दास, समझ लज्जा को धर तू।
कौन वस्तु है विश्व में, जिसे न ला दूंगा तुझे,
यदि निज लस्मित वदन को, क्षण भर दिखला दे मुझे ॥
मैं तेरा होचुका, और तू मेरी होगी,