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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 94

वेद शास्त्रों की आज्ञा ४६
जिस घर मे नारियों की पूजा अर्थात् सत्कार होता है उस
कुल मे दिव्य गुण, दिव्य भोग और उत्तम सन्तान उत्पन्न होती
है और जिस कुल मे स्त्रियों की पूजा अर्थात् आदर सत्कार नहीं
होता उस कुल की सब क्रियाएं निष्फल होती है।
शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशुतत्कुलम् ।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्द्धते तद्धिसर्वदा ॥
जिस कुल मे स्त्रियां अपने अपने पुरुषो के दुष्टाचरणों से वा
व्यभिचारादि दोषो से शोकातुर रहती है वह कुल शीघ्रही नाश
को प्राप्त होजाता है और जिस कुल मे स्त्रीजन पुरुषो के उत्तमा-
चरणों से प्रसन्न रहती हैं वह कुल सर्वदा बढ़ता रहता है।
यदि पुरुष श्रेष्ठ हो तो दुष्टा स्त्रियां भी सभल जाती हैं। शास्त्र
बतलाता है, ऋषियों का कहना है।
एताश्चान्याश्च लोकेऽस्मिन्नपकृष्ट प्रसूतयः ।
उत्कर्ष योषितः प्राप्ताः स्वैःस्वैर्भर्तृगुणैः शुभैः ॥
अर्थात्-इस संसार में दुष्टाचरण युक्त बहुत स्त्रियां अपने
अपने पतियों के शुभ गुणों से सुधर गई और सुधर जाती हैं तथा
सुधर जायंगी इसलिये यदि पुरुष श्रेष्ठ हो तो स्त्रियां श्रेष्ठ और पुरुष
दुष्ट हों तो स्त्रियां दुष्ट होजाती हैं। इससे प्रथम पुरुषो को उत्तम
होकर स्त्रियों को उत्तम बनाना चाहिये ।
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