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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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४८ भूमिका
सदा प्रसन्न रहते हैं उसी कुल मे निश्चित कल्याण होता है और
जिसमे दोनो परस्पर अप्रसन्न रहते हैं उस कुल मे नित्य कलह
वास करता है जैसा कि आजकल प्राय पति पत्नी मे कलह
रहा करती है।
यदि हि स्त्री न रोचेत पुमांसं न प्रमोदयेत् ।
अप्रमोदात् पुनः पुंसः प्रजनं न प्रवर्त्तते ॥
यदि स्त्री पुरुष पर रुचि न रक्खे या पुरुष को प्रसन्न न करे
तो अप्रसन्नता से पुरुष के शरीर मे कामोत्पत्ति भली भांति न
हो के सन्तान नही होती और यदि होवे तो दुष्ट होती है ।
इसी प्रकार गर्भाधान क्रिया के समय पुरुष स्त्री को प्रसन्न
न करे तो स्त्री को उत्तेजना नही होती इसलिये गर्भ रहता ही
नही है ।
स्त्रियान्तु रोचमानायां सर्वतद्रोचते कुलम् ।
तस्यां त्वरोचमानायां सर्वमेव न रोचते ॥ मनु०
जो पुरुष स्त्री को प्रसन्न नही करता उस स्त्री के अप्रसन्न
रहने से सब कुल भर अप्रसन्न और शोकातुर रहता है और जब
पुरुष से स्त्री प्रसन्न रहती है तब सब कुल आनन्द रूप प्रसन्न
दिखलाई देता है ।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाक्रियाः ॥