विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 92, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंदाम्पत्य प्रेम का अभाव ४७
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मुझ घर के स्वामी की स्त्री, जैसे तेरा दीर्घकाल पर्यन्त जीवन हो। वैसे
ही उत्तम ज्ञान और उत्तम व्यवहार को यथावत जान, अपनी
आशा को सब जगत् की उत्पत्ति और सम्पूर्ण ऐश्वर्य का देनेवाला
परमात्मा कृपा से सदा सिद्ध करे जिससे तू और मै सदा उन्नतिशील
होकर आनन्द में रहें।
सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः।
अन्यो अन्यमभिहर्यतवत्सं जातमिवाघ्न्या ॥
ईश्वर आज्ञा देता है—
हे गृहस्थो ! मै ईश्वर तुमको जैसी आज्ञा देता हूँ वैसा
ही करो जिससे तुमको अक्षय सुख हो अर्थात् जैसी अपने
लिये सुख की इच्छा करते और दुःख नहीं चाहते हो वैसे ही
पिता माता सन्तान स्त्री पुरुष दास मित्र पड़ोसी और अन्य सबसे
समान हृदय से रहो। मनसे सम्यक प्रसन्नता और वैर विरोधादि
रहित व्यवहार को तुम्हारे लिये स्थिर करता हूं।
जैसे उत्पन्न हुये बछड़े पर गाय प्रेम से वर्त्तती है वात्सल्य-
भाव रखती है तुम भी एक दूसरे से प्रेम पूर्वक कामना से वैसा
ही वर्त्ताव करो।
सन्तुष्टो भार्यया भर्त्ता भर्त्रा भार्या तथैवच।
यस्मिन्नेव कुले नित्यं कल्याणं तत्र वै ध्रुवम् ॥
हे गृहस्थो ! जिस कुल मे पत्नी से पति और पति से पत्नी