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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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४६ भूमिका

की क्रिया को अच्छे प्रकार जानने वाले, सदा हास्य और आनन्द
युक्त बड़े प्रेम से अत्यन्त प्रसन्न हुए उत्तम चाल चलनवाले, धर्मयुक्त
व्यवहार में अच्छे प्रकार चलने वाले, उत्तम पुत्र वाले, श्रेष्ठ
गृहादि सामग्री युक्त उत्तम प्रकार जीवों को धारण करते हुए गृह-
स्थाश्रम के व्यवहारों को पूर्ण करो।

इहेमाविन्द्र संनुद चक्रवाकेव दम्पती ।
प्रजयै नौ स्वस्तकौ विश्वमायुर्व्यश्नुताम् ॥

अर्थात्—हे इन्द्र ! परमैश्वर्य युक्तविद्वान् ! आप संसार मे इन
स्त्री पुरुषो को समय पर विवाह करने की आज्ञा दीजिये और ऐसी
व्यवस्था दीजिये कि जिससे ब्रह्मचर्य पूर्वक शिक्षा को पाकर दम्पति
(पति और पत्नी) चकवा चकवी के समान एक दूसरे से प्रेमवृद्ध
रहें अर्थात् प्रेम मे वधे रहे (एक दूसरे के विरुद्ध आचरण न करे)
और गर्भाधान विधि से उत्पन्न हुई सन्तान से ये दोनों सुखी
होकर सम्पूर्ण १०० वर्ष पर्यन्त आयु को पावे।

प्रबुध्यस्व सुबुधाबुध्यमाना,
दीर्घायुत्वाय शतशारदाय ।
गृहान् गच्छ गृहपत्नी यथासो,
दीर्घ त आयुः सविता कृणोतु ॥

हे पत्नी ! तू (शतशारदाय) सौ वर्ष पर्यन्त दीर्घ काल जीने
के लिये उत्तम बुद्धि युक्त संज्ञान हो मेरे घर को प्राप्त हो और