विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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रहूंगा वैसे ही तू मेरी भार्या भी करती रहे। इसी प्रकार वधू भी
कहती है कि मैं भी आपको इच्छा के विरुद्ध आपका कोई अप्रिय
कार्य न करूंगी।
पाठक पाठिकाओ ! हमारे देश मे विवाह का लक्ष्य स्त्री
पुरुष का प्रेम से रहकर उत्तम सन्तान उत्पन्न करने का है। यही
वेद और शास्त्रो में बतलाया है क्योंकि स्त्री पुरुष को परमात्मा
ने सृष्टि की उन्नति के ही लिये उत्पन्न किया है।
भारतवर्ष मे विवाह बन्धन पति पत्नी का एक बड़ा भारी
बन्धन समझा जाता है और इस बन्धन मे बधे रहकर पति
पत्नी प्रेम पूर्वक उत्तम सन्तान उत्पन्न कर मनुष्य जीवन का
आनन्द भोगे यही विवाह का लक्ष्य है। जिन देशो मे विवाह
बन्धन नही समझा जाता वहा विवाह केवल मन बहलाव के
लिये ही किया जाता है और जब पति पत्नी मे कुछ भी अनबन
हो जाती है तो पत्नी पति से अपना सम्बन्ध तोड़ देती है। पति का
कुछ अधिकार नही रहता। पाश्चात्य देशो मे इस प्रकार की अनेक
घटनाये नित्यप्रति हुआ करती हैं।
हमारे देश में पति पत्नी का सम्बन्ध किसी समय किसी
प्रकार टूट नही सकता क्योकि वेद की आज्ञानुसार विवाह के
समय पति पत्नी दोनो परस्पर प्रतिज्ञा करते हैं।
ओं मम व्रते ते हृदयं दधामि।
मम चित्तमनुचित्तं ते अस्तु ॥