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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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३६ भूमिका

त्वष्टा वासो व्यदधाच्छुभे कं,
बृहस्पतेः प्रशिषा कवीनाम्।
तेनेमां नारीं सविता भगश्च,
सूर्यामिव परिधत्तां प्रजया ॥
हे शुभानने ! जैसे इस परमात्मा की सृष्टि में उसकी तथा
आप्त विद्वानों की शिक्षा से दम्पती होते हैं, जैसे बिजली सबको
व्याप्त हो रही है वैसे तू मेरी प्रसन्नता के लिये सुन्दर वस्त्र और
आभूषण तथा मुझसे सुख को प्राप्त हो। इस मेरी और तेरी इच्छा
को परमात्मा सिद्ध करे। जैसे सकल जगत् की उत्पत्ति करने वाला
परमात्मा, पूर्ण ऐश्वर्य युक्त उत्तम प्रजा (सन्तान) से इस
तुच्छ मुझ नर की स्त्री को आच्छादित शोभा युक्त करे वैसे मैं
इन सबसे सूर्य की किरण के समान तुझको वस्त्र और भूषणादि
से सदा सुशोभित रक्खूंगा ।
इन्द्राग्नी द्यावापृथिवी मातरिश्वा,
मित्रावरुणौ भगो अश्विनोभा ।
बृहस्पतिर्मरुतो ब्रह्म सोम,
इमां नारीं प्रजया वर्धयन्तु ॥
हे मेरे सम्बन्धी लोगो ! जैसे बिजली और प्रसिद्ध अग्नि सूर्य
और भूमि अन्तरिक्षस्थ वायु प्राण और उदान तथा ऐश्वर्य, सद्वैद्य