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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह का उद्देश्य ३३
ने बनाया है। मनुसंहिता के अनुसार पति पत्नी का सम्बन्ध जीवन
भर का संग है। पति से पत्नी किसी दशा मे अलग नहीं हो सकती
न त्याग देने से, न बेच देने से, न दान मे देने से। इसलिये विवाह का
नियम हमारे शास्त्रकारो ने बडे विचार के साथ रक्खा है परन्तु इस
समय इतना विचार किया नहीं जाता। नाई बारी और पुरोहितो
की रायपर विवाह होता है, वे इधर की उधर मिलाकर मेल मिला
देते हैं परन्तु वह मेल शास्त्रोक्त नहीं होता।
शास्त्रकारो ने बतलाया है:—
सम्यग्धर्म्मार्थकामेषु दम्पतिभ्यामहर्निशम् ।
एकचित्ततया भाव्यं समानव्रतवृत्तितः॥ मनु०
धर्म, अर्थ और काम विषय मे पति को पत्नी सर्वदा एक
मन होना चाहिये। एक मन होने से ही गृहस्थी रूपी गाड़ी
ठीक चलती है क्योकि पति पत्नी उस गाड़ी के दो समान
पहिया हैं।
अनृतावृतुकाले च मंत्र संस्कार कृत्पतिः।
सुखस्य नित्यं दातेह परकाले च योषितः॥
मन्त्रादि द्वारा विवाह कर्त्ता स्वामी सब समय मे स्त्री को
सुखदाता, आनन्द देने वाला होता है केवल इसी काल मे नहीं
परकाल मे भी वह पत्नी को सुखदेने वाला होता है। पढिये
विवाह सम्बन्ध मे:—
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