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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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३० भूमिका
दाम्पत्य प्रेम का प्रभाव
यह दाम्पत्य प्रेम का ही प्रभाव था कि राजा दशरथ के ही
समान उनके पुत्र श्री रामचन्द्र भी हुए और उन के पुत्र लव और
कुश भी वैसे ही पराक्रमी तेजवान और कीर्तिवान हुए।
उत्तम सन्तान उत्पन्न करने के लिये पति पत्नी में गाढ़ प्रेम
रहना सबसे जरूरी है दाम्पत्य प्रेम स्वर्ग का भी दुर्लभ पदार्थ है।
उत्तम सन्तान की प्राप्ति की इच्छा रखने वाले पति पत्नी दोनो
को प्रेम से रहना चाहिये। जिस प्रकार पत्नी के लिये शास्त्रकारों
ने पातिव्रत धर्म्म का पालन करना आवश्यक बतलाया है उसी
प्रकार पति को भी पत्नीव्रत करना बतलाया है।
दोनो को अपने अपने व्रत पालने से ही उत्तम सन्तान उत्पन्न
होती है। जहां पति पत्नी में प्रेम नहीं होता और पत्नीव्रत तथा
पतिव्रत का पालन नहीं होता वहां सन्तान भी ठीक नहीं होती।
व्यभिचारी तथा विषयी पति की सन्तान भी वैसी ही दुर्गुणों वाली
होती है। पर स्त्री गमन करने वाले व्यभिचारी कहे जाते हैं और
अपनी स्त्री से नियम विरुद्ध रात दिन विषय करने वाले विषयी
कहे जाते हैं। वीर्य को नष्ट करने में दोनों एक ही समान हैं। इस
लिये उत्तम सन्तान की इच्छा रखने वाले को नियम पूर्वक केवल
अपनी ही स्त्री से प्रेम रखकर रतिक्रिया करनी चाहिये। जिससे
सन्तान आरोग्य और दीर्घजीवी हो। दाम्पत्य प्रेम का जो बड़ा
भारी प्रभाव सन्तान पर पडता है वह प्रभाव कई पुश्तों तक वैसा